IGNCA में राहुल सांकृत्यायन पर प्रदर्शनी का आयोजन, पटना म्यूजियम से लाए गए पुरावस्तु

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नई दिल्ली/पटना : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के आर्ट गौलरी में पटना संग्रहालय के साथ मिलकर राहुल सांकृत्यायन से जुड़ी पांडुलिपि और कलाकृतियों पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. यह तकरीबन एक महीने तक चला. इस दौरान भारी संख्या में साहित्य और कला के क्षेत्र से जुड़े लोग देखने पहुंचे. इससे पहले आईजीएनसीए में  ‘राहुल सांकृत्यायन: महापंडित इन द लैंड ऑफ़ स्नो’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन भी आयोजित किया गया था.

इस सम्मेलन में नौ सत्रों के माध्यम से महापंडित राहुल सांकृत्यायन के जीवन, शोधकार्यो, उनके द्वारा संगृहीत पांडुलिपियों और उनकी रोमांचक यात्राओं पर चर्चा हुई. सम्मेलन का आयोजन आईजीएनसीए ने भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के साथ मिलकर किया. इस मौके पर राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक प्रीतम सिंह, राहुल सांस्कृत्यायन की बेटी जया सांकृत्यायन, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष प्रो० एसआर भट्ट औक आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी भी शामिल हुए.

आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि आईजीएनसीए ने पटना संग्रहालय के साथ मिलकर प्रदर्शनी का आयोजन किया है, जिसमे राहुल सांकृत्यायन के द्वारा संगृहीत दुर्लभ चित्रों, पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया गया है, जो कि 80 साल में पहली बार पटना संग्राहलय से बाहर कहीं प्रदर्शित हो रही है.

Rahul Sankrityayana in Massuori

ईस्ट एशिया प्रोजेक्ट की विभागाध्यक्ष डॉ राधा बनर्जी सरकार ने बताया कि ‘राहुल सांस्कृत्यायन बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट विद्वान थे, उन्हें हिंदी साहित्य और तिब्बत की कठिन और रोमांचक यात्राओं के लिए जाना जाता है, ऐसे विद्वान के ऊपर आईजीएनसीए अपने  ईस्ट एशिया प्रोजेक्ट के तहत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें विदेश के लगभग 90 वरिष्ट शोधार्थी हिस्सा लिए साथ ही प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया.

भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष प्रो. एसआर भट्ट ने कहा कि हमारे यहां विद्वान लोगों को पंडित उपाधि से नवाजा जाता रहा है, लेकिन राहुल सांकृत्यायन को महापंडित की उपाधि प्राप्त है, आज भारत सरकार लुक एशिया, एक्ट एशिया की पालिसी पर काम कर रही हो लेकिन राहुल सांस्कृत्यायन ने बहुत पहले ही इस पालिसी पर काम शुरू कर दिया था. वे बहु भाषी होने के साथ-साथ महान शोधार्थी थे.

Mauogalyayana, wood, lhasa, 16th cent.

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में राहुल सांकृत्यायन के द्वारा उनकी तिब्बत यात्रा के दौरान संग्रहित वस्तुओं की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस प्रदर्शनी का आयोजन आईजीएनसीए ने पटना संग्राहलय के सहयोग से किया. प्रदर्शनी में राहुल सांकृत्यायन द्वारा 80 वर्ष पूर्व संग्रहित दुर्लभ थंका चित्रों, धातु एवं लकड़ी की मूर्तियां, पांडुलिपियां, उनकी पुस्तकों आदि को प्रदर्शित किया गया.

इससे पहले ऐसा 1930 में हुआ था जब इसे लंदन में प्रदर्शित किया गया था. करीब 8 दशकों से ये वस्तुएं पटना संग्रहालय में ही थी. इस प्रदर्शनी को यहां लगाने का उदेश्य भारतीय कला, संस्कृति और विरासत में महापंडित राहुल सांकृत्यायन के महत्वपूर्ण योगदान को उन अध्येताओं, विद्वानों के बीच प्रसारित करना भी है जो उन्हें एक घुमक्कड़ विद्वान के तौर पर जानते आये हैं.

Rahul Sankrityayana with Swami Pranavananda in Nepal

यह संग्रह पटना संग्रहालय को स्वयं राहुल सांकृत्यायन द्वरा भेंट स्वरुप दिया गया था. इन पुरावस्तुओं को जिन्हें उन्होंने 1929, 1934, 1936, 1938 में भारत की खोई हुई विरासत की खोज के दौरान प्राप्त किया था और इन्हें बेहद कठिनाई भरे सफ़र के द्वारा तिब्बत से भारत लाए थे.

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