हिंदी न्यूज़ – your facebook data is only worth 300 rupey on the dark web

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डार्क वेब की दुनिया में चंद रुपयों में बिक रहा आपका डेटा

इंटरनेट में डेटा सिक्योरिटी की हालात ये है कि आपके जीमेल और फेसबुक का डेटा डार्क वेब में 65 और 300 रुपयों में बिक रहा है.




Updated: March 28, 2018, 7:41 AM IST

फेसबुक डेटा ब्रीच के बाद इंटरनेट पर डेटा सिक्योरिटी को लेकर बहस छिड़ी हुई है. दुनिया के बड़े-बड़े टेक विशेषज्ञ इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. लेकिन कंटेंट मार्केटिंग एजेंसी Fractl की नई रिपोर्ट के मुताबिक डार्क वेब की दुनिया में चंद रुपयों में बिक रहा है आपका डेटा.

जी हां.. Fractl एजेंसी ने ये रिपोर्ट डार्क वेब से लेकर वॉल स्ट्रीट मार्केट और ड्रीम प्वाइंट तक की रिसर्च कर तैयार की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक आपके जीमेल से लेकर फेसबुक और बाकी ऐप्लीकेशन पर डाला गया डेटा महज चंद रुपयों की खातिर चुराकर, इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

कितने में बिक रहा डेटा?
Fractl की रिपोर्ट के मुताबिक डार्क वेब पर फेसबुक लॉगिन महज 5.20 डॉलर यानि 336 रुपए में बिक रहा है. इसके जरिए क्रिमिनल आपके निजी डेटा को हैककर अपने मन मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं. फेसबुक के अलावा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली PayPal पर मौजूद आपके पूरे आर्थिक डेटा को महज 16 हजार रुपए में हासिल किया जा सकता है.अगर आपके पूरे जीमेल डेटा की बात करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि कोई भी महज 65 रुपए में हैकर की मदद से आपकी जानकारी चुरा सकता है. इसमें आपके जरूरी मेल के अलावा बैकिंग डिटेल्स भी शामिल हो सकती हैं.

आपकी A टू Z जानकारी मौजूद
इंटरनेट की दुनिया को सुरक्षित कहने वाले कितना भी दावा कर लें लेकिन आपकी एक एक जानकारी को हैक किया जा सकता है. Fractl की रिपोर्ट के मुताबिक आपकी पूरी ऑनलाइन पहचान, जिसमें पर्सनल आइडेंडिटी नंबर, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य जानकारियां महज 1200 डॉलर में हैक की जा सकती है.

कहां बेची जाती हैं जानकारियां?
साइबर स्काउट के संस्थापक एडम लेविस के मुताबिक ‘हैकिंग दरअसल डिमांड और सप्लाई का खेल है.’ आज बाजार में आपकी निजी जानकारियों को खरीदने वालों की भरमार है. इनमें कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियां तैयार हैं. हैकर्स आपकी जानकारियां चुराकर जितना जल्दी हो सकता है, कंपनियों को बेच देते हैं.

कार्बन ब्लैक सिक्योरिटी फर्म के स्ट्रैटेजिस्ट रिक मैकइलेरी के मुताबिक बीते साल 5.3 अरब रिकॉर्ड एक्सीडेंट से लीक हुए थे. जबकि 2.6 अरब रिकॉर्ड को हैकिंग कर चुराया गया.

दुनिया की बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों को बेचने के लिए यूजर्स के निजी डेटा का सहारा ले रही हैं. कंपनियां उस पैटर्न को समझकर अपनी आगे की नीतियां निर्धारित करती हैं.

हैकर्स के निशाने पर कौन?
सिक्योरिटी फर्म जेवेलिन के वरिष्ठ वाइस प्रेसिडेंट अल पास्कुल ने बताया कि हैकर्स के निशाने पर अमीर लोग होते हैं. उदाहरण के लिए उन्होंने बताया कि एक स्टुडेंट की बजाए रिटायर शख्स उनका आसाना निशाना होगा. क्योंकि उसके पास मौजूद पैसा कहीं ज्यादा होगा.

कुछ इसी तरह इलेक्शन के दौरान सबसे ज्यादा मांग वोटरों के डेटा की होती है. ऐसे में हैकर्स चुनाव करने वाली संस्थाओं को निशाना बनाते हैं. पास्कुल ने तो यहां तक कहा कि हैकर्स आसानी से वोटिंग मशीनों में सेंध लगा सकते हैं.

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