हिंदी न्यूज़ – these are the throwback stories from 2017 from entertainment_ये हैं साल 2017 की सबसे फेवरेट कहानियां

0
13


साल 2017 खत्म होने को है. यह साल मनोरंजन की दुनिया में बहुत से उतार-चढ़ाव लेकर आया है. हमने आपके लिए बहुत की कहानियां लिखीं, आपने हमें बहुत सारा प्यार दिया.

अब बारी है उन कहानियों और आपके प्यार के रिकैप की. हम आपके लिए लेकर आए हैं उन कहानियों का एक गुलदस्ता, जिन्हें आपने बहुत पसंद किया था. एक बार फिर से उन्हें पढ़िए और हमें फिर से बताइयेइस कहानियों में बॉलीवुड है, हॉलीवुड है, संगीत है, ब्लॉग्स हैं और बहुत सारा एंटरटेनमेंट है. तो अपना मोबाइल, लैपटॉप, या कोई भी डिवाइस उठाएं, पॉपकॉर्न का एक बड़ा सा पैकेट लीजिए और फिर से जुड़ जाइए हमारे साथ अपनी फेवरेट कहानियों के जरिए.

बॉलीवुड के कुछ किस्से:

1. राजकुमार के बारे में कहने के लिए कई किस्से हैं लेकिन इंडियन ऑफ़ दि ईयर बनने वाले इस शख़्स को नहीं लगता कि उसके पास कोई कहानी है.‘न तो मेरे पास कोई जूसी स्टोरी है न ही किसी दर्दनाक स्ट्रगल की कहानी. मेरे पास देने के लिए कोई हेडलाइन नहीं हैं. हां मैंने मेहनत की, धक्के खाये और रिजेक्शन सहे, पर मुम्बई में मेरे लिए क्यों कोई बांहें फैलाकर खड़ा हो जाता!’अगर ये डॉयलाग है तो राजकुमार राव इन्हें बड़े खालिसपन के साथ डिलीवर करते हैं. जैसे वह उन संवादों को कहते हैं, जो उनके अलग अलग रोल्स उनसे कहलवाते हैं. फ़र्क सिर्फ ये है कि ये उनकी अपनी ज़िंदगी के बारे में है.

दिल्ली-गुड़गांव में पले बढ़े राजकुमार राव की रेंज और डेप्थ आप पर हर बार छाप डालती है, भले ही वह ‘शाहिद’ का वकील हो या ‘सिटीलाइट्स’ में स्ट्रगलर या ‘क्वीन’ में कंगना रनौत का पति, ‘अलीगढ़’ का जर्नलिस्ट, ‘न्यूटन’ का इलेक्शन ऑफिसर या ‘लव सेक्स और धोखा’में सेल्समैन. पढ़िए कैसे एक आम सा लड़का आज राजकुमार बन गया.

इंडियन ऑफ़ दि ईयर भी बन गया, हर रोल में घुस जाने वाला ‘राजकुमार’

2. उनका नाम सुनते ही किसी के भी दिमाग में प्यार को लेकर एक इमेज तैयार हो जाती है और ये उनका चार्म ही है जो पर्दे पर उन्हें रोमांस करता देख लड़कियां उनपर मर मिटती हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि लड़कियों के लिए ‘हीरो’ और ‘परफेक्ट बॉयफ्रेंड’ बनने वाले शाहरुख किसी-किसी के लिए आंख का कांटा भी साबित होते हैं. अब इससे पहले कि आप ज्यादा लोड लें, बता दें कि शाहरुख हकीकत में नहीं बल्कि उन फिल्मों में सेकेंड लीड की आंखों का कांटा साबित होते हैं जहां वह उनकी हीरोइन को ले उड़ते थे.

ऐसा शाहरुख ने एक दो बार नहीं बल्कि कई फिल्मों किया है. हाल ही में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ में भी वह किसी और की मंगेतर के प्यार में पड़ते नजर आ रहे हैं.

ये पहली बार नहीं, दूसरों की गर्लफ्रेंड ‘हाईजैक’ करते रहे हैं शाहरुख

3. लोहा मना तो दीपिका का. दीपिका के पास न तो कोई गॉडफादर रहे, न ही कोई फैमिली. मसलन वह न तो हिंदी पट्टी से आती है और न ही कोई कह सकता है कि उसकी एक्टिंग बहुत ताबड़तोड़ है. वह मॉडलिंग से फिल्मों में आई और अपने फोकस, प्रोफेशनलिज्म के साथ.

दीपिका पादुकोण मुम्बई में एक आऊटसाइडर थीं. अब नहीं हैं. अब वे स्टारडम के उस तल पर हैं जहां बहुत से बाकी लोग वह मुकाम हासिल न कर सके. जो ऊपर लिखे कायदों और कसौटियों पर खरे उतरते थे. ये है दीपिका पादुकोण की सबसे सच्ची कहानी:

दीपिका पादुकोण की ये कहानी ‘पद्मावती’ के बारे में नहीं है

हॉलीवुड की यादें:

4. फ़िल्म ‘टाइटैनिक’ का लीड जैक, जिसे लियोनार्डो डि कैप्रियो निभा रहे थे, एक स्केच आर्टिस्ट था और महिलाओं के नग्न स्केच बनाने में उसे महारत हासिल थी. जैक एक दृश्य में रोज़ यानि केट विंस्लेट का एक वैसा ही चित्र बनाता है और सेकेंड के सौवें हिस्से के लिए केट बिना कपड़ों के नज़र आती है. 70 एम एम के पर्दे पर रोज़ के उस लुभावने स्वरुप को देखने के लिए भी सिनेमाघरों के बाहर लाइन लग रही थी.

हालांकि दूसरी थ्योरी का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, सो हम मान लेते हैं कि ‘टाइटैनिक’ नाम के इस सिनेमाई करिश्मे को सलाम करने ही सिने प्रेमियों की भारी भीड़ इस चलचित्र के मोहपाश में बंधी चली आ रही थी. टाइटैनिक डूब गया, जैक भी डूब गया, उस साल के ऑस्कर अवार्ड्स में फिल्म को 11 ऑस्कर मिले और बाकी सभी फ़िल्मों के अरमान भी डूब गए लेकिन उभर कर आईं केट विंस्लेट….

20 साल हो गए, वो टाइटैनिक वाली लड़की भूलती नहीं!

ऐसा म्यूजिक और कहां:

5. 1980 में जब मोहम्मद रफी का निधन हुआ तो संगीत प्रेमियों के जहन में एक अकाल सा छा गया. एक तरफ से किशोर कुमार ने पारी संभाल रखी थी लेकिन दूसरे सिरे पर कोई टिक नहीं पा रहा था. जैसा कि किसी भी सफल गायक के साथ होता है, बहुत से गायकों ने रफी साहब की आवाज में गाने की कोशिश की लेकिन इस भीड़ में जिस आवाज ने निर्देशकों और संगीतकारों को आशा की किरण नजर आई, वो थे शब्बीर कुमार. आज की पीढ़ी के लिए शायद यह नाम कुछ कम जाना पहचाना हो लेकिन वीडियोगेम आ जाने से कॉमिक्स का महत्व कम नहीं हो जाता, बल्कि ‘विंटेज’ के नाम से वो पुरानी चीज और भी कीमती हो जाती हैं.

आज उम्र के अगले पड़ाव पर पहुंच चुके लोग जब 80 के दशक में जवान हो रहे थे, उनके साथ जवान हो रहे थे बॉलीवुड के गाने. पहले प्यार की कसक, बिछुड़ने का गम और कभी ना मिल पाने की अनिश्चितता के बीच शब्बीर कुमार ने उस पीढ़ी को यह गीत दिया था. पढ़िए एक कमाल के गायक की कहानी और सुनिए उनके गाने.

शब्बीर कुमार, जिनकी किस्मत मोहम्मद रफी के जनाजे में लिखी गई थी!

6. जैसे हिंदी साहित्य में अलग-अलग लेखकों के सम्मान में उनके नामों पर युग निर्धारित किये गए हैं, उसी तर्ज पर बॉलीवुड में कुछ ऐसे म्यूजिशियन और गायक हुए हैं जिनके नाम पर यदि युगों के नाम रखे गए तो अल्ताफ राजा के नाम पर एक अदद युग मयस्सर होगा. कव्वाली की विधा में मॉडर्न इश्क की छौंक लगाने वाले अल्ताफ राजा के फैन्स उनके गानों पर आज भी उसी कदर जान छिड़कते हैं.

अल्ताफ के गाने सिर्फ गाने नहीं होते एक अनुभव होता है. लिरिक्स, इमोशन और बीच बीच में ऐसी मारक शायरियां जो सुनकर मुंह से ‘वाह-वाह’ अपने आप ही निकल जाता है.

अल्ताफ राजा, क्योंकि वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है

ये है हमारे ‘दिल की बात’:

7. “पूरा थिएटर खाली था. मैं कोने-कोपचे में छुपी आशिकों की प्रजाति ढूंढ रही थी. कोई तो हो जो यह फिल्म देखने में मेरा साथ दे.

समय बीतने लगा. एक के बाद एक विज्ञापन आने लगे. राष्ट्र्गान भी आ गया लेकिन उस थिएटर में दूसरा कोई भी दर्शक नहीं आया. फिल्म शुरू हुई, 5 मिनट, 10 मिनट, आधा घंटा बीत गया. अब मुझे पक्का यकीन हो गया कि यह फिल्म मैं बिल्कुल अकेले ही देखने वाली हूं.

गजब के विजुअल इफेक्ट्स और बहुत से इंसानी इमोशन्स से भरी एक शानदार फिल्म देखने का यह अनुभव बहुत कमाल का था. लेकिन उससे भी ज्यादा कमाल की बात थी कि करीब 250 लोगों की कैपेसिटी वाले एक थिएटर में मैने बिलकुल अकेले बैठकर एक फिल्म देखी.” क्या हुआ जब एक लड़की ने थिएटर में अकेले फिल्म देखी!!!

जब एक अकेली लड़की को थिएटर में बंदरों ने घेर लिया!

8. आज फिर एक एक्टर के जूतों के रंग की वजह से लोगों ने सोशल मीडिया पर उसे गालियां दीं… एक पॉलिटीशियन के माइक को गलत तरीके से पकड़ने की वजह से उसके खानदान को कटघरे में खड़ा कर दिया गया और आज फिर एक एक्ट्रेस के कपड़ों, मेकअप और बालों की वजह से उसके चरित्र को सोशल मीडिया की दीवारों पर काली स्याही से पोत दिया गया. आज फिर किसी सेलिब्रिटी को ट्रोल किया गया.

कितना छोटा सा शब्द है, ट्रोल. हिंदी में ढाई अक्षर का और अंग्रेजी में पांच अक्षरों से बना. लेकिन हर सुबह न्यूज रूम में आते ही सबसे पहले यही शब्द हमारे कानों में पड़ता है, ट्रोल, ट्रोल, ट्रोल. आप कुछ भी कर लें, आज की तारीख में खुद को इनसे बचा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगता है.

कुछ भी करो, ज्ञान और गाली देने आ ही जाते हैं ट्रोलर्स!

इन एक्ट्रेसेज ने की बड़ी उम्र में शादी:

ये भी पढ़ें:

‘टाइगर जिंदा है’ के बाद अब दूसरी हिट की तैयारी में सलमान!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here