हिंदी न्यूज़ – story of a sex worker mother/’मुझे मालूम है, ‘जो आपके साथ सोया हो अगले दिन वही बेटी के साथ सोए तो कैसा लगता है’

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‘कहानी- एक सेक्स वर्कर मां की’

मैं ज़िंदगी में कभी भी मां नहीं बनना चाहती थी. मेरी दादी सेक्स वर्कर थी, मां सेक्स वर्कर थी. मेरा सेक्स वर्कर होना भी कोई अपवाद नहीं था. ये हमारे परिवार का पुराना पेशा है. एक ज़ंजीर है, जिसमें नए पांव बंधते जा रहे हैं. मैं, मां न बनने का फैसला करके उसका अंत करना चाहती थी. लेकिन बच्चे को जन्म देने के कुदरत के चक्र को रोकना बेहद मुश्किल है.

मैंने सेक्स वर्कर मां का दर्द देखा है. उसे अपने साथ तंग गली में खड़े हुए कस्टमर्स को ढूंढते देखा है. जो कस्टमर आपके साथ सोया हो जब अगले दिन वही आपकी बेटी के साथ सोता है तो कैसा लगता है. मुझे सब मालूम है. मां को अपने कमरे में मरने की कोशिश करते देखा है, लेकिन वो बच गईं.मैं कभी भी मां नहीं बनना चाहती थी, लेकिन जब मैंने बच्चे को गर्भ में महसूस किया तो ज़हन बदल गया. मैं उसे मारना नहीं चाहती थी. सभी ने मुझे बच्चा गिराने के लिए कहा, पर मैं नहीं कर पाई. मेरी मैडम (बॉस) ने भी मुझपर अबॉर्शन का दबाव बनाया लेकिन मेरे पास जितनी क़ुव्वत थी, मैंने सब बच्चे को बचाने में लगा दी. फिर मैडम ने बाबू (बच्चे का पिता) को बुलाया. वही बाबू जो मेरे पास सबसे ज़्यादा आया करता था. एक रोज़ उसने वादा भी किया था कि वो मुझसे शादी करेगा.

मैडम ने बाबू को बताया कि ये बच्चा उसका हो सकता है और मैं उसे कभी भी ब्लैकमेल कर सकती हूं. बाबू ने मुझे बहुत मारा, इतना कि उसकी मार से बच्चा गिर जाए. संतुष्ट नहीं हुआ तो फिर अबॉर्शन का दबाव बनाया. बच्चे की ज़िंदगी के लिए मैंने उसके हाथ-पांव जोड़े. कॉन्ट्रेक्ट कर उसे भरोसा दिलाया कि मैं अपने बच्चे के लिए कभी भी, किसी का नाम नहीं चाहती.

वेश्यालयों में रहकर, मां होना आसान नहीं है. बहुत सारी औरतें खराब ट्रीटमेंट के चलते दम तोड़ देती हैं. गर्भ में पल रहे बच्चे के साथ टारगेट कस्टमर्स को अटेंड करना हर दिन नई जंग करने सा होता है. बहुत से बीमार ज़हनियत वाले, करुणा शून्य पुरुष शारिरिक संतुष्टि के लिए गर्भवती औरतों के साथ संबंध बनाने को इंजॉय करते हैं.

उन नौ महीनों में मैंने हर लम्हा बेटा जनने की दुआ मांगी. लेकिन ऊपर वाले ने मेरी नहीं सुनी. मेरे परिवार के एक और सदस्य ने मेरी कोख से जन्म लिया, वो बेटी ही है.

सभी ने मुझसे कहा, एक और बार फिर से वही होगा. लेकिन मैं उस नन्ही सी जान को इस जहन्नुम से निकालने के लिए दृढ़ संकल्पी हूं. खुद से वादा किया है, कई पीढ़ियों से हमारे पांवों में पड़ी इस ज़ंजीर में अपनी बिटिया के पांव नहीं जकड़ने दूंगी.

एक मां जब बच्चे को बेहतर ज़िंदगी देने का ठाती है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता. कोई भी नहीं.

शोपना की कहानी को कॉपी करने की मनाही है, हमने इसे फेसबुक पेज GMB Akash की इजाज़त से लिखा है.

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