हिंदी न्यूज़ – Mother’s Day Special: ‘मां अक्सर फ़ोन पर ये कहकर रो देती है कि तेरी तस्वीर देख रही थी’-This Will Make Your Mother Happy

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मदर्स डे पर आप भी अपनी मां के लिए तमाम तरीके के तोहफे खोज रहे होंगे. कुछ ने तो सप्राइज भी प्लान किय होगा. उन्हें स्पेशल फील करवाने के लिए आप इतना कुछ कर रहे हैं. वो इससे खुश होंगी, वो यही तो चाहती हैं… नहीं? पर क्या आप वाकई जानते हैं कि वो क्या चाहती है?

दो दिन पहले मेरे पास मां का फोन आया. कह रही थी कि पेपर मे कोई आर्टिकल पढ़ा कि मदर्स डे पर ही क्यों मां को खास फील करवाया जाता है, क्या मां हर दिन बच्चे के लिए खास नहीं होती. मेरे पास उनके सवाल का जवाब नहीं था. मैंने हमम… कर दिया.

मैं भी एक आम लड़की की तरह रोज दफ्तर जाती हूं. दूसरे शहर में रहने के कारण मां से मिलना कम ही हो पाता है. सच पूछें तो फोन पर बात करने के लिए भी मेरे पास इतना समय नहीं होता. दोस्तों से फोन पर कई घंटे बतिया लेती हूं, लेकिन मां से कुछ देर बात करने के बाद लगता है अब क्या कहूं? शायद आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता होगा.

रात जब बिस्तर पर गई तो मां के सवाल ने मुझे जकड़ लिया,पल को पुराने वक्त की सैर पर चली गई.

मां वर्किंग वुमन थीं तो भाई के साथ ही मेरा ज्यादा समय बीताता था. पर मां इस बात का ध्यान रखती थीं कि मुझे कभी उनकी कमी महसूस न हो. स्कूल से आने के बाद रोज मुझे फोन करतीं और ढेरों बातें करती. फाल्गुनी पाठक का गाना “और पिया लेके डोली आ” सुनाने को कहतीं और पूरे ऑफिस को स्पीकर पर सुनाती. मैं जल्दी सो जाया करती थी तो आता ही किचन में खाना बनाने लग जाती थी.

धीरे-धीरे मैं बड़ी होती गई और अपनी दुनिया मे खोती चली गई. फोन और दोस्तों से ज्यादा करीब आती गई. पर शायद मां अपनी अलग दुनिया नहीं बना पाई. कॉलेज और ऑफिस के बाद उनके साथ बिताने को समय कम ही मिलता और तब तक मां ने ऑफिस भी छो़ड़ दिया था. घर आते ही वो मेरे दिन के बारे में पूछती ताकि इसी बहाने मुझे उनके साथ वक्त बिताने को मिले, पर मैं थक कर सो जाती थी.

आज इतनी दूर बैठी हूं उनसे, मेरे रूटीन काम की सारी जिम्मेदारियां मेरी ही है, फिर भी न जाने क्यों फोन करके पूछती हैं खाना खाया? रैंट दे दिया? कपड़े प्रेस से आ गए? वगैरह-वगैरह. उनसे किसने कहा इतना लोड लेने के लिए, अगर कुछ न भी हुआ हो तो वो वहां बैठकर क्या कर सकती हैं? ये तो वो समय है जब वो अपनी लाइफ जो जी सकती हैं, अपने लिए समय निकाल कर जो चाहें कर सकती हैं. पर शायद मां ऐसी ही होती है.

वो आपको खुद से दूर जाने देती है ताकि आप सयाने बन सकें, जमाने की दौड़ में आगे निकल सकें. वो आपको चलने से लेकर हर वो बात सिखाती है जो जीने के लिए जरूरी है, बस खुद ही नहीं सीख पाती- आपके बिना रहना.

सालों हो गए जब घर से दूसरे शहर में रहने निकली थी, लेकिन आज भी हर बार जब घर से आती हूं तो रो देती है. कभी-कभी फोन पर ये कहकर इमोशनल हो जाती है कि तेरी तस्वीर देख रही थी. क्या आपको ऐसा कोई दिन याद है जब मां ये बिना पूछे फोन रख दिया हो कि खाना खाया या नहीं, मुझे तो नहीं है. हम सब अपनी दुनियां में इतना खो गए हैं कि इन बातों पर ठीक से गौर नहीं कर पाते.

सच पूछिए तो वो सिर्फ आपकी सलामती चाहती हैं और बस इतना कि आप उन्हें भूलें नहीं. ये स्वार्थी नहीं है उनके दिल से ये डर कभी नहीं जाता कि उनका बच्चा हाथ छुड़ा कर दूसरी दुनिया में गुम हो जाएगा.

इस मदर्स डे पर आप जो चाहते हैं अपनी मां को दीजिए पर साथ ही एक वादा भी कीजिए कि जब वो आपसे खाने के लिए पूछे तो आप भी पटलकर जवाब में “खा लिया” के साथ ये पूछेंगे कि “आपने खाया?”. जब वो आपको अपनी तमाम बातें बता रही हों तो सुन लेंगे. माना आपको दूर की आंटी की जिंदगी में चल रहे किसी मसले से कोई राबता नहीं पर मां के पास कहने को शायद कोई नहीं है. सबसे जरूरी, दिन में एक बार ही सही उन्हें बताएंगे कि आपके लिए कितनी खास हैं, अहसास करवाएंगे कि आप दुनिया के किसी भी कोने में हों आपका एक छोर हमेशा उनसे जु़ड़ा है.

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