हिंदी न्यूज़ – dhanraj Pillay exclusively talks about current indian hockey team and hockey’s changed scenario पूर्व कप्तान धनराज पिल्ले ने क्यों कहा, ‘काश मैंने इस दौर में हॉकी खेली होती’

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पूर्व कप्तान धनराज पिल्ले ने क्यों कहा, 'काश मैंने इस दौर में हॉकी खेली होती'!

पूर्व कप्तान धनराज पिल्ले ने क्यों कहा, ‘काश मैंने इस दौर में हॉकी खेली होती’

विमल कुमार@Vimalwa

विमल कुमार@Vimalwa

| News18Hindi

Updated: February 15, 2018, 7:26 PM IST

धनराज पिल्ले भारतीय हॉकी का वो चेहरा हैं जिन्हें किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है. पिल्ले ने news18hindi.com के साथ मौजूदा हॉकी टीम के बारे में ख़ास बातचीत की.

आपके हॉकी छोड़े इतने साल हो गए. लेकिन जहां भी आप जाते हैं आपको पुराने दिनों की याद आती है?
अच्छा लगता है कि पुराने लोग आकर मिलते हैं. समय बदल गया है लेकिन पुराने मीडिया के भाई आज भी हमें प्यार करते हैं. उसी सम्मान की नज़र से देखते हैं जैसे पहले देखते थे जब मैं हॉकी टीम के लिए खेला करता था. भारत की मौजूदा हॉकी टीम उम्दा है. विश्व कप, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स की तैयारी कर रही है.

इस पीढ़ी में सबसे बड़ा बदलाव क्या लगता है?हॉकी के खेल में कुछ बदलाव ज़रूर आए हैं. खेल फास्ट हो गया है, फिटनेस पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है. मैं जब खेला करता था तब मेरी फिटनेस अच्छी हुआ करती थी. मौजूदा टीम के साथ खेलता तो वो और अच्छी हो जाती. उस वक्त कम मैचफी को लेकर मैंने लड़ाई लड़ी, आज के खिलाड़ियों को उसके लिए लड़ना नहीं पड़ा. हॉकी इंडिया ने हर हॉकी खिलाड़ी को लीग में खिलाकर लखपति तो बना ही दिया. जो खिलाड़ी कई सालों से महनत कर रहे हैं उन्हें अपने भविष्य की चिंता नहीं करनी होगी.

जिस तरह क्रिकेट आगे बढ़ा है क्या हॉकी के साथ भी वैसा हुआ?
हॉकी की किसी और खेल के साथ तुलना करना भी गलत है. हॉकी ही 8 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतकर लाया है. क्रिकेट को हॉकी से ऊपर रखना ग़लत है. क्योंकि हॉकी ने ही हिन्दुस्तान को ओलंपिक में 8 बार गोल्ड दिलाया, विश्व कप जीता है, एशियन गेम, कॉमनवेल्थ फाइनल जीता है. हां, मैं ये ज़रूर कहूंगा कि क्रिकेट से हमें प्रोफेशनलिज़म, खिलाड़ियों की सैलरी, स्पॉनसपशिप के बारे में ज़रूर सीखना चाहिए. लेकिन पिछले 5 साल से हॉकी ने भी ये सब किया है.

आपने ओलंपिक में 8 मेडल जीतने की बात कही. पिछली बार भारतीय टीम मेडल के करीब पहुंची लेकिन फिर नाकाम रही. आपको क्या लगता है कि मौजूदा हॉकी टीम इतिहास दोहरा पाएगी?

मेरा सपना है कि हॉकी टीम ओलंपिक और विश्व कप में गोल्ड मेडल जीते. जिस दिन ऐसा होगा उस दिन से अगले 15 साल के लिए कोई भी हॉकी को छू नहीं सकेगा. और आप टीम की ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और बेल्जियम से तुलना कर सकते हैं. जब मैं खेला करता था तब अर्जेंटीना और बेल्जियम को कुछ नहीं समझता था. ये टीमें कमज़ोर थीं. और इन्हें आज देखिए. पिछले 10 साल में काफी बदलाव आया है. टीम ओलंपिक में फाइनल खेलती हैं. मुझे लगता है हॉकी इंडिया में सही दिशा में जा रही है. टीम को बस विश्व कप और ओलंपिक गोल्ड की ज़रूरत है.

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