हिंदी न्यूज़ – birthday of actress audrey hepburn | हॉलीवुड की ऑड्रे हेपबर्न की जन्मतिथि

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अमेरिकी फिल्म संस्थान की अगर मानें तो उन्हें हॉलीवुड फिल्म इतिहास में सार्वकालिक तीसरी सबसे बेहतरीन अदाकारा माना जाता है. ब्रिटिश अदाकारा ऑड्रे हेपबर्न किसी लेजेंड से कम नहीं हैं, अपने समय में वो फैशन की मिसाल मानी जाती थी लेकिन उस समय वो दुनिया के लिए मिसाल बन गई जब उन्होंने अपने फिल्मी करियर को एकतरफ रख कर मानवता की सेवा का बीड़ा उठा लिया.

बेल्जियम में पैदा हुई ऑड्रे को बचपन से ही गीत संगीत और नाट्य कलाओं में रुचि थी. वो लगातार इन सभी चीज़ो में हिस्सा लेती रहीं और वो हमेशा कहती कि वो एक दिन कुछ बड़ा हासिल करेंगी. शायद सितारों को भी यही मंज़ूर था. ऑड्रे की पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म रोमन हॉलिडे (1953) रिलीज़ हुई और इस फिल्म में उनकी एक्टिंग का जलवा ऐसा रहा कि उन्हे इस एक भूमिका के लिए ऑस्कर, बाफ्टा और गोल्डन ग्लोब हासिल हुए.

ऑड्रे रातोंरात स्टार बन गईं और फिर उनके नाम कई सुपरहिट फिल्में रहीं, लेकिन आज बात उनके फिल्मी करियर की नहीं बल्कि उनके एक दूसरे करियर की हो रही है. ऑड्रे का बचपन बेहद व्यथित था. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनके परिवार को कई बार रिफ्यूजी कैंपो में शरणार्थी बनना पड़ा था. उनके पिता अचानक फासीवाद के प्रभाव में आ गए और ऑड्रे ने नाज़ी बर्बरता को करीब से देखा.

शायद ये ऑड्रे के बचपन का ही असर था कि उन्होंने समाज के लिए काम करने की ठान ली. जहां एक तरफ उनके सामने शानोशौकत की ज़िंदगी और चमकदार शोहरत से भरा फिल्मी करियर था वहीं दूसरी तरफ UNICEF की ओर से मानवता दूत बनने का ऑफर.Audrey Hepburnऑड्रे ने बिना सोचे अपने फिल्मी करियर की परवाह न करते हुए UNICEF के लिए शांति और मानवता कार्यों में मदद करनी शुरु कर दी और वो मैक्सिको, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के अन्य पिछड़े देशों में काम करने लगी.

मानव समाज के लिए किए गए उनके काम के लिए ऑड्रे को UNICEF की ओर से सम्मानित भी किया गया. वो तु्र्की के युद्धग्रस्त इलाकों में लोगों को बीमारियों से बचने के टीके लगाने के लिए खुद गईं थी. इसके अलावा वो ग्वातेमाला, बांग्लादेश, एल साल्वाडोर जैसे देशों में युद्ध के समय खाना उपलब्ध करवाने और प्राकृतिक आपदाओं के बीच राहत कार्यों के लिए खुद मौजूद रहीं.

ऑड्रे चाहती तो सिर्फ UNICEF के राहत कैंपन का चेहरा बन कर इसका विज्ञापन कर सकती थीं लेकिन उन्होंने इसके लिए फील्ड में जाना चुना. वो कहती थीं,”समस्या को देखकर उससे मुंह मत मोड़िए, क्योंकि आपके मुड़ते ही मानवता मुड़ जाती है.”

ऑड्रे ने सालोंसाल अफ्रीका में महामारियों से लड़ने के लिए लोगों को वैक्सीन लगाने का काम किया. लगभग एक साल अफ्रीका में काम करते करते ऑड्रे की तबियत गिरने लगी और तब उन्हें अमेरिका लौटना पड़ा. लेकिन ये भी एक दुखद पहलू रहा कि जब ऑड्रे वापस अमेरिका लौटीं तो उन्हें अपेंडिक्स का कैंसर डिटेक्ट हुआ. इस कैंसर का कोई इलाज मौजूद नहीं था. सालों साल लोगों को जीवनदान देने वाली ऑड्रे खुद एक महामारी का शिकार बनी और उसके बाद 20 जनवरी 1993 को उन्होंने नींद में इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

ऑड्रे के सबसे अच्छे दोस्त ग्रेगरी पेक ने उनकी जाने की आखिरी सूचना लोगों को दी थी और उन्होंने इसके बाद रबीद्रनाथ टैगोर की एक कविता ‘Unending love’ को पढ़ा था क्योंकि यही उनकी पसंदीदा कविता थी. आज भी ऑड्रे की याद में UNICEF के न्यूयॉर्क हेडक्वार्टर में एक मू्र्ति लगी है जिसका नाम है ‘द स्पिरिट ऑफ ऑड्रे’

तस्वीरों में देखिए, भारत की ऑड्रे, नरगिस

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