हिंदी न्यूज़ – 40 रुपये भत्ता लेकर 10 मिनट में तिहाड़ से फरार हुआ था शेर सिंह राणा | How phoolan murder case accused sher singh rana escaped from tihar jail

0
1


17 फ़रवरी 2004 को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर तिहाड़ जेल में शेर सिंह राणा से मिलने एक पुलिस अफसर आता है. अफसर कहता है कि कोर्ट में राणा की पेशी है इसलिए ले जाना है. महज़ 10 मिनट के अंदर यानी 7 बजकर 5 मिनट पर फूलन देवी की हत्या का मुख्य आरोपी शेर सिंह राणा तिहाड़ से चला जाता है. 40 मिनट बाद यानी पौने आठ बजे जेल प्रशासन को पता चलता है कि राणा कोर्ट नहीं गया है बल्कि जेल से फरार हो गया है.

अस्ल में तिहाड़ जेल से भागने की साज़िश पिछले एक साल से रच रहा था, जिसकी जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी. यह किस्सा शुरू हुआ 2003 में जब राणा को आभास हुआ कि उसके खिलाफ चल रहे मुकदमे के फैसले में उसे सज़ा-ए-मौत भी हो सकती है तब उसने जल्द से जल्द जेल से फरार होने की योजना बनाना शुरू की.

बहरूपिये की ली मदद

इस योजना के तहत उसने जेल में रहते हुए अपने सूत्रों के ज़रिये उन गैंगस्टरों के पास सूचना पहुंचवाई कि वह जेल से भागना चाहता है. गैंगस्टरों ने राणा की फरारी के लिए पैसों का इंतज़ाम करने की मंज़ूरी दे दी. अब राणा को एक स्कीम की ज़रूरत थी. तभी उसे खयाल आया अपने कस्बे रुड़की के एक बहरूपिये संदीप का. राणा ने संदीप तक अपना मैसेज पहुंचवाया और उससे जेल में आकर मिलने को कहा. संदीप ने जेल में आकर राणा से मुलाकात की और राणा ने पूरी स्कीम उसे समझाई.

राणा की तिहाड़ से फरारी में साथ देने के लिए संदीप राज़ी हो गया और उसने कहा कि वह इस काम के लिए 6 लाख रुपए लेगा. राणा ने पैसों का बंदोबस्त पहले ही कर रखा था इसलिए उसने संदीप से कहा कि पैसों की चिंता न करे, मिल जाएंगे. इसके बाद शुरू हुआ जेल प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का खेल.

जनवरी 2004 से संदीप ने जेल में लगातार आकर राणा से मुलाकात का सिलसिला शुरू किया. संदीप जेल में राणा के वकील प्रदीप ठाकुर की पहचान बताकर आता-जाता था. राणा ने अपने भाई के ज़रिये जो रकम संदीप को मुहैया करवाई थी, उससे संदीप ने हथकड़ियों और पुलिस की वर्दी का इंतज़ाम किया. 16 फरवरी को संदीप जेल में आया और उसने राणा से कहा कि कल सुबह प्लैन के मुताबिक तैयार रहे.

देखें न्यूज़ 18 की खास पेशकश — VIDEO: 17 साल बाद फूलन देवी हत्याकांड में आया नया मोड़

दस मिनट में गायब हुआ राणा

17 फरवरी की सुबह तिहाड़ की जेल नंबर 1 के बाहर एक आॅटो आकर रुका. भेस बदलकर एक पुलिस अफसर की यूनिफॉर्म में संदीप तिहाड़ जेल के भीतर आया. उसने नकली वॉरंट और जाली दस्तावेज़ जल्दबाज़ी में जेल प्रशासन को दिखाते हुए कहा कि हरिद्वार कोर्ट में राणा की पेशी है इसलिए उसे ले जाना है. जेल प्रशासन ने कोर्ट के दस्तावेज़ों को सरसरी तौर पर देखते हुए इजाज़त दे दी. संदीप ने राणा को हथकड़ी पहनाई और कैदी को बाहर ले जाने पर मिलने वाले भोजन भत्ते के रूप में जेल प्रशासन से 40 रुपये लिये.

इसके बाद राणा को लेकर संदीप जेल के दरवाज़े के बाहर पहुंचा जहां एक आॅटो उसका इंतज़ार कर रहा था. दोनों उस आॅटो में बैठे और संदीप के जेल में दाखिल होने के करीब दस मिनट बाद ही जेल से रवाना हो गए.

तिहाड़ से कंधार तक

तेज़ रफ्तार में तिहाड़ जेल से निकला आॅटो रुका कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर. राणा और संदीप आॅटो से उतरे और दोनों गाज़ियाबाद के लिए छूट रही बस में जा बैठे. इधर, इतने वक्त में तिहाड़ जेल में अफरा तफरी मच गई कि राणा भाग गया है. हर बड़ा ओहदेदार अपने अधीनस्थ को डांटता रहा और इध-उधर फोन की घंटियां बजने लगीं. उधर, गाज़ियाबाद उतरकर राणा और संदीप अलग हो गए.

यहां से राणा पहले मुरादाबाद गया. मुरादाबाद पहुंचकर उसने अपने कुछ और सूत्रों से बातचीत की और अगली गाड़ी से रांची चला गया. इस बीच, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रुड़की, हरिद्वार और मुज़फ्फरनगर स्थित राणा के तमाम ठिकानों पर छापेमारी शुरू की लेकिन राणा का बाल तक पुलिस को न मिला. रांची पहुंचते ही राणा अपने एक मददगार से मिला और स्कीम के मुताबिक इंतज़ाम का जायज़ा लिया.

फूलन देवी, फूलन देवी हत्याकांड, फूलन देवी का हत्यारा, शेरसिंह राणा की जीवनी, शेरसिंह राणा, phoolan devi, phoolan devi murder case, sher singh rana, phoolan devi murderer, sher singh rana biography

शेरसिंह राणा

राणा के उस दोस्त ने कुछ ही देर में राणा को नकली पासपोर्ट दिया जिसमें राणा की पहचान दिल्ली पुलिस के एसीपी के तौर पर दर्ज थी. राणा ने पासपोर्ट लेते ही कलकत्ता का रुख किया जहां से उसे फ्लाइट लेना थी. कलकत्ता पहुंचकर राणा ने बांग्लादेश की उड़ान भरी और वह देश से ही गायब हो गया. हालांकि कुछ ही दिनों में राणा का साथ देने वाले संदीप को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया लेकिन संदीप से राणा की कोई पुख़्ता खबर पुलिस को नहीं मिल सकी.

फिर अफगानिस्तान से आया राणा की वीडियो

अचानक एक दिन एक वीडियो सामने आया. वीडियो में नज़र आने वाला शख़्स कोई और नहीं बल्कि शेर सिंह राणा था. दिल्ली पुलिस और हिंदुस्तानी मीडिया के लिए हैरानी की बात थी कि वीडियो अफ़ग़ानिस्तान के एक शहर कंधार का था. अस्ल में, बांग्लादेश पहुंचने के बाद राणा ने वहां फर्जी कागजात के आधार पर एक विश्विद्यालय में दाखिला लिया. इसी बीच उसने भारत से अफगानिस्तान के वीज़ा का इंतज़ाम किया और फिर दुबई गया. दुबई में कुछ वक्त में अतिरिक्त रकम का इंतज़ाम करने के बाद राणा ईरान के रास्ते अफगानिस्तान पहुंचा.

राणा ने अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी शहर से वीडियो बनाया था जिसमें वह दिल्ली के आखिरी हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की समाधि की खुदाई करता हुआ नज़र आ रहा था. पृथ्वीराज चौहान को हिंदू और राजपूत समाज का गौरव बताते हुए उनकी समाधि से वह मिट्टी लेकर भारत आना चाहता था, उसने वीडियो में यह ज़िक्र किया.

फिर दो साल बाद पकड़ा गया राणा

इस वीडियो के बाद पुलिस ने तफ्तीश की तो पूरी कहानी लगभग पता चल गई. पुलिस को एक अहम बात यह पता चली कि वीज़ा संबंधी नवीनीकरण की प्रक्रियाओं के लिए राणा को कलकत्ता आना ही होता है. राणा कई बार भारत और बांग्लादेश की सीमा पार कर चुका था, इसके बावजूद दो साल तक पुलिस राणा को पकड़ पाने में नाकाम रही. दो साल बाद यानी जुलाई 2016 में पुलिस को एक मुखबिर के ज़रिये पता चला कि राणा कलकत्ता आने वाला है.

फूलन देवी, फूलन देवी हत्याकांड, फूलन देवी का हत्यारा, शेरसिंह राणा की जीवनी, शेरसिंह राणा, phoolan devi, phoolan devi murder case, sher singh rana, phoolan devi murderer, sher singh rana biography

शेरसिंह राणा

यह सूचना सही निकली और पुलिस ने अपना जाल बिछाया. डीसीपी संजीव यादव की टीम राणा की हर गतिविधि पर नज़र रखे हुए थी और इस मौके को हाथ से जाने न देने के लिए कमर कस चुकी थी. मुखबिरों की टिप्स के मुताबिक कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस ने आखिरकार राणा को कलकत्ता के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया. इस होटल में राणा दिल्ली पुलिस के एसीपी की जाली पहचान देकर ठहरा हुआ था.

दोबारा भी भाग सकता था राणा

राणा के फरार होने, फरार होकर कारनामे करने के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में यह चिंता लगातार बनी हुई थी कि राणा फिर न भाग जाए. पहले ही सुरक्षा तंत्र की काफी किरकिरी हो चुकी थी इसलिए इस बार राणा के लिए अलग और पुख़्ता बंदोबस्त किए जा रहे थे. इन्हीं बंदोबस्तों में से एक था कैदी राणा के लिए अलग कपड़े. कैदियों को जो यूनिफॉर्म जेल में दी जाती थी वह सफेद होती थी लेकिन राणा को लाल यूनिफॉर्म दी गई ताकि हर वक्त वह नज़र में रहे और सुरक्षाकर्मी उसके प्रति सतर्क रहें. लेकिन यह इंतज़ाम ज़्यादा नहीं चला क्योंकि राणा ने इस भेदभाव के खिलाफ याचिका दायर की और कोर्ट ने उसे यूनिफॉर्म देने के आदेश दे दिए.

राणा ने लिखी जेल डायरी

तिहाड़ जेल में रहते हुए शेर सिंह राणा ने एक तरह से अपनी आत्मकथा लिख डाली. हार्पर-कॉलिन्स पब्लिशर्स इंडिया, नई दिल्ली द्वारा फूलन देवी हत्याकांड में आरोपी तिहाड़ जेल में बंद शेरसिंह राणा लिखित ‘जेल-डायरी : तिहाड़ से काबुल कंधार तक’ प्रकाशित की गई. पुस्तक में शेरसिंह राणा ने अपनी ज़ुबानी अपने बचपन, विद्यार्थी जीवन के बारे में भी खुलासे किए हैं.

फूलन देवी, फूलन देवी हत्याकांड, फूलन देवी का हत्यारा, शेरसिंह राणा की जीवनी, शेरसिंह राणा, phoolan devi, phoolan devi murder case, sher singh rana, phoolan devi murderer, sher singh rana biography

शेर​सिंह राणा लिखित किताब जेल डायरी.

इस किताब में फूलन हत्याकांड के आरोप में तिहाड़ पहुंचने और तिहाड़ में जेल जीवन के शेर सिंह राणा के संस्मरण हैं. अफगानिस्तान से अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज की समाधि खोदकर भारत लाने की बचपन की इच्छा का भी उसने ज़िक्र किया है. उसने लिखा है कि इस काम के लिए उसे तिहाड़ से फरार होना पड़ा. जेल-डायरी में राणा ने देश की सबसे सुरक्षित समझी जाने वाली जेल की सुरक्षा व्यवस्था को आसानी से ठेंगा दिखाकर फरार हो जाने की कहानी भी विस्तार से लिखी है.

राजपूतों का हीरो रहा है राणा

दिल्ली के सबसे सुरक्षित इलाकों में शुमार लुटियंस जोन में हुए फूलन देवी हत्याकांड ने काफी राजनीतिक तूफान मचाया था. दो दिन बाद शेरसिंह राणा ने देहरादून में आत्मसमर्पण कर इल्जाम अपने सिर ले लिया था. राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कुछ नेता दबी जुबान में राणा का बचाव कर रहे थे.

फूलन देवी, फूलन देवी हत्याकांड, फूलन देवी का हत्यारा, शेरसिंह राणा की जीवनी, शेरसिंह राणा, phoolan devi, phoolan devi murder case, sher singh rana, phoolan devi murderer, sher singh rana biography

शेरसिंह राणा

शेरसिंह राणा ने उस समय भले ही फूलन देवी की हत्या की बात कबूली पर बाद में उसने कोर्ट में कहा कि उसको इस केस में झूठा फंसाया गया है. शेर सिंह राणा पर आई एक किताब में राणा ने पुलिस पर जबरदस्ती जुर्म कबूल करवाने का आरोप लगाया. कुछ लोगों का दावा है कि पिछले 16 साल से बेहमई गांव में शेर सिंह राणा की पूजा की जाती है. सुबह-शाम राणा की तस्वीर पर फूल-मालाएं चढ़ाई जाती हैं.

राणा फिर आया सुर्खियों में

शेरसिंह राणा इसी महीने दो कारणों से अचानक फिर सुर्खियों में आ गया है. मई 2018 में ही राणा ने मध्य प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार की बेटी से शादी की है और उसने दहेज को ठुकराकर फिर खबरों में जगह बनाई. इसके बाद करीब एक हफ्ते पहले राजपूत समाज के एक कार्यक्रम में राणा फूलन देवी की बहन मुन्नी देवी के साथ नज़र आया तो सबकी आंखें चुंधिया गईं. इस कार्यक्रम के बाद न्यूज़ 18 से खास बातचीत में राणा और मुन्नी ने फूलन हत्याकांड के सिलसिले में नये खुलासे करते हुए हत्याकांड को एक नया मोड़ दे दिया. वीडियो में देखें न्यूज़ 18 की खास पेशकश.

ये भी पढ़ेंः
कौन है फूलन देवी का हत्यारा? Suspense के बीच कहानी में नये मोड़!
दोस्त दोस्त न रहा, प्यार प्यार न रहा तो इस तरह लिखा गया अंत
‘शाहरुख खान’ बन गया रफीक और बदल दिया ‘डर’ का क्लाइमेक्स!
Social Media पर मिला शेख, Phone पर हुई शादी और फिर?
फिरौती लेने पहुंचे नहीं, शहर बदलते रहे बस हो गई एक चूक!
झारखंड के गांव का रईस ‘Robinhood’ यूं डालता था बैंक खातों पर साइबर डाका

Gallery – True Crime Books : अपराधों और मन की परतें खोलती हैं ये किताबें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here