हिंदी न्यूज़ – 1 जून 2001 : प्रेमिका को फोन करने के बाद पूरे परिवार को भून डाला | Nepal royal massacre: how prince murdered whole family

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नेपाल के राजपरिवार में हुए नरसंहार की दास्तान नेपाल के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है. 1 जून 2001 को प्रिंस दीपेंद्र ने अपने परिवार के नौ सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया था. इस घटना ने सिर्फ नेपाल ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को तब हिला दिया था. इस हत्याकांड की तुलना अमरीकी राष्ट्रपति कैनेडी के हत्याकांड से भी की गई. इस नृशंस हत्याकांड की अब तक की सबसे चर्चित थ्योरी. क्या हुआ था उस रात? मिनट दर मिनट की कहानी.

नेपाल का राजमहल – 1 जून 2001

शाम साढ़े सात बजे प्रिंस दीपेंद्र पहले से तय फैमिली गैदरिंग के लिए पहुंचा. राजमहल में उसने अकेले बिलियर्ड्स खेलते हुए व्हिस्की के दो पैग्स पिए. रात 8 बजे दीपेंद्र गैदरिंग में अपनी मां ऐश्वर्या को लेने के लिए गया. आते वक्त रानी ऐश्वर्या बिलियर्ड्स रूम के पास प्रिंसेस हेलेन से बात करने के लिए रुकीं तो दीपेंद्र बिलियर्ड्स रूम में चला गया.

प्रिंस दीपेंद्र ने 8 बजकर 12 मिनट पर देवयानी राणा से फोन पर करीब सवा मिनट बात की. इसके बाद दीपेंद्र ने एक सहयोगी से फोन पर स्पेशल सिगरेट मंगाई. हशीश और एक और नशीले पदार्थ से बनी ये सिगरेट्स उस सहयोगी ने पारस को दीं कि वो दीपेंद्र को दे दे. तकरीबन साढ़े 8 बजे कई लोगों ने देखा कि प्रिंस दीपेंद्र खुद को संभाल भी नहीं पा रहा है. वह जुनून में बोलते हुए हकला रहा था. तैश में झगड़ने लगा था. राजा बीरेंद्र के सबसे छोटे भाई धीरेंद्र के दामाद डॉ. राजीव शाही, दीपेंद्र के कज़िन पारस और दीपेंद्र के छोटे भाई निरंजन ने उसे सहारा देकर उसके रूम तक पहुंचाया.READ: नेपाल रॉयल पैलेस हत्याकांड : प्रिंस की ज़िद थी मोहब्बत, रानी की ज़िद थी घराना

तकरीबन साढ़े 8 बजे देवयानी के कहने पर दीपेंद्र के सहयोगी उसके रूम में पहुंचे और दीपेंद्र के कपड़े उतारने में मदद की. इसके बाद दीपेंद्र बाथरूम में गया तो सहयोगियों ने बाथरूम से ऐसी आवाज़ें सुनीं जैसे वह उल्टी कर रहा था. दीपेंद्र ने बाथरूम से बाहर आकर सहयोगियों को अपने-अपने कमरों में जाकर सो जाने का आदेश दिया.

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प्रिंस दीपेंद्र

इस बीच बिलियर्ड्स रूम में राजा बीरेंद्र पहुंच चुके थे और इधर करीब 8 बजकर 40 मिनट पर दीपेंद्र ने एक बार फिर देवयानी को फोन किया और 32 सेकंड की बातचीत में कहा कि वह सोने जा रहा है और कल बात करेगा. इस फोन के बाद दीपेंद्र ने आर्मी वाला गेटअप पहना और बेडरूम से हथियारों के साथ बाहर निकला और बिलियर्ड्स रूम की तरफ गया.

इधर नेपाल के राजमहल में फ्राइडे डिनर के लिए राज परिवार के सदस्य जमा थे. दीपेंद्र को उसके क्वार्टर में छोड़कर शाही, पारस और निरंजन के वहां लौटने से पहले राजा बीरेंद्र और राजपरिवार के करीब 20 और सदस्य एल शेप के ड्रॉइंग रूम में आ गए थे और वहां छोटे छोटे ग्रुप्स में बैठे थे. यहां एक स्नूकर टेबल रखी हुई थी.

कुछ ही पलों में कई हथियारों से लैस होकर दीपेंद्र वहां आया और सबसे पहले उसने अपने पिता राजा बीरेंद्र को निशाना बनाया. राजा बीरेंद्र को गोली मारने के तुरंत बाद दीपेंद्र उस कमरे से चला गया लेकिन अगले ही पल फिर लौटा. राजा बीरेंद्र के भाई धीरेंद्र ने दीपेंद्र को रोकने की कोशिश की तो दीपेंद्र ने उनकी छाती पर पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली दागी.

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पूर्व नेपाल नरेश बीरेंद्र

इस गोली के बाद दीपेंद्र ने ओपन फायर शुरू कर दिया और जो उसके सामने आया, उसने उस पर गोली चलाने लगा. वहां मौजूद सभी लोग इधर-उधर भागे. राजीव शाही ने गोलियों की आवाज़ सुनी और भगदड़ देखी तो एक खिड़की से कूदकर सुरक्षा गार्डों और एंबुलेंस को बुलाने के लिए दौड़े. राजा बीरेंद्र, धीरेंद्र और खडग को दीपेंद्र गोलियां मार चुका था. इसके बाद दीपेंद्र वापस दरवाज़े की तरफ गया लेकिन फिर मुड़ा. दोबारा गोलीबारी शुरू की और इस राउंड में प्रिंसेस श्रुति, प्रिंसेस शारदा, उसकी आंटी शांति और एक कज़िन प्रिंसेस जयंती मारी गईं.

दीपेंद्र की गोलीबारी से घबराकर दीपेंद्र की मां ऐश्वर्या और दीपेंद्र के भाई बगीचे की तरफ भागे थे. धड़ाधड़ गोलियां चला रहा दीपेंद्र अपने भाई निरंजन और मां के पीछे बगीचे में गया. निरंजन अपने भाई और मां के बीच में आया और उसकी पीठ पर कई गोलियां दीपेंद्र ने मारीं. इसके बाद मां प्रिंस के रूम की तरफ भागी लेकिन दीपेंद्र ने उन्हें सीढ़ियों के पास शूट कर दिया.

नशे में धुत दीपेंद्र एक से डेढ़ मिनट तक गोलियां बरसाता रहा और इस बीच उसने हथियार भी बदले. आखिरकार बगीचे में मां को शूट करने के बाद बगीचे में ही बह रही एक धारा पर बने पुल पर खड़े होकर दीपेंद्र ने खुद को भी गोली मार ली. दीपेंद्र को एक जून की रात को ही अस्पताल ले जाया गया था लेकिन 4 जून की शाम को उसे मृत घोषित कर दिया गया.

इस क्राइम सीन से उठे सवाल?

इतना हंगामा हो रहा था और राजमहल के सुरक्षा गार्ड और सहयोगी स्टाफ कहां था?
दीपेंद्र ने अपने सिर में गोली मारकर आत्महत्या की थी लेकिन गोली सिर के बाईं तरफ लगी थी जबकि दीपेंद्र राइट हैंडर था.
उस फैमिली डिनर में इस हत्याकांड के बाद राजा बनने वाले प्रिंस ज्ञानेंद्र मौजूद क्यों नहीं थे?
इस हमले में राजा ज्ञानेंद्र का बेटा पारस कैसे बच गया?
इस हमले के बाद दो सदस्यीय दल की जांच रिपोर्ट में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय तक नहीं ली गई और यह भी सवालों के घेरे में रही.
क्या इस हमले से भारत का कोई लेना-देना था? हां तो कैसे?
और आखिर इस हमले के पीछे दीपेंद्र के पास कारण क्या था?

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