हिंदी न्यूज़ – ‘हद पार कर चुका था J Dey, उसका मरना ज़रूरी था’ : छोटा राजन

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पत्रकार ज्योतिर्मय डे मुंबई के अंडरवर्ल्ड की अंदरूनी सच्चाइयों पर आधारित एक किताब लिखने के दौर में थे. 2011 में इस किताब के लेखन के सिलसिले में डे कई लोगों से मिल रहे थे और खतरे उठाते हुए फैक्ट्स जुटा रहे थे. डे को मालूम था कि उनके कुछ कदम जोखिम भरे थे फिर भी उन्होंने जोखिम उठाया. लेकिन यह अंडरवर्ल्ड से बर्दाश्त नहीं हुआ और इस जोखिम की कीमत डे को अपनी जान से चुकानी पड़ी.

डे अपनी किताब के लिए जानकारियां जुटाने के लिए कभी किसी बार में तो कभी अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों के गुप्त ठिकानों पर जाते थे. जिन लोगों से 2011 में डे मुलाकात कर रहे थे, उनमें से ज़्यादातर अंडरवर्ल्ड डॉन कहे जाने वाले छोटा राजन के विरोधी थे. राजन तक यह खबर पहुंच चुकी थी कि डे उनके विरोधियों से मुलाकात कर रहे हैं. डे को भी पता चल चुका था कि उनकी मुलाकातों की खबर राजन को मिल चुकी है.

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डे ने फिलीपीन्स और लंदन में छोटा राजन से मुलाकात करने की कोशिश भी की लेकिन बात और बिगड़ती चली गई. राजन ने डे को धमकी भरा संदेश भिजवाया कि डे अपनी किताब लिखना बंद कर दें. अस्ल में राजन तक यह खबर पहुंच चुकी थी कि इस किताब में डे की कोशिश है कि वह राजन की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करें और दाउद की बेहतर. धमकियों से डरने के बजाय डे ने इसे नज़रअंदाज़ किया और फिर एक कदम और आगे बढ़ाया.

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पत्रकार ज्योतिर्मय डे.

एक तरफ धमकियां मिल रही थीं और दूसरी तरफ डे के दो लेख छपे.

पहले का शीर्षक था – ‘क्या राजन ने कासकर पर हमले की साज़िश रची थी?’ इस लेख में डे ने लिखा था कि अंडरवर्ल्ड के शेर कहे जाने वाले दाउद के मुंह का निवाला छीनने के लिए बेताब राजन इस शूटआउट के लिए हड़बड़ाया हुआ था. दूसरे लेख का शीर्षक था – ‘राजन के गुर्गों की तीर्थयात्रा खत्म.’ इस लेख में डे ने राजन की गैर कानूनी गतिविधियों को लेकर राजन को नकारात्मक रोशनी में प्रस्तुत किया था.

इन दो लेखों की खबर राजन तक पहुंची और राजन गुस्से में आ गया. इस गुस्से की आग में घी का काम किया, डे की विरोधी पत्रकार जिग्ना की बातों ने. जिग्ना ने राजन को डे के खिलाफ उकसाने का काम किया. राजन से जिग्ना को इंट्रोड्यूस कराने वाला था पोल्सन. राजन अब आगबबूला हो चुका था और उसने अपने गुर्गों को डे पर नज़र रखने का हुक्म दिया. और शुरू हो गई भीतर ही भीतर एक साज़िश.

राजन ने साज़िश तैयार की जिसे अंजाम दिया उसके गुर्गों ने. डे पर नज़र रखने का काम बारी बारी से अनिल, विनोद, अभिजीत, बबलू, अरुण और सचिन का था. अपनी टीम को इस निगरानी के काम पर कालिया मैनेज कर रहा था. सतीश कालिया को पूरे काम को अंजाम देने के लिए 5 लाख रुपये देने का वादा राजन ने किया था. कालिया इस आॅपरेशन के दौरान लगातार राजन के संपर्क में बना हुआ था.

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पत्रकार ज्योतिर्मय डे.

राजन के कहने पर पोल्सन ने कालिया को दो लाख रुपये बतौर एडवांस दिए और साथ ही दो इंटरनेशनल सिम कार्ड भी. 7 जून को अरुण ने सचिन के साथ उमा बार जाकर डे की पहचान की. 7 जून 2011 के बाद से ही डे पर लगातार नज़र रखी जा रही थी. इसी बीच, कालिया तीन साथियों अनिल, बबलू और अभिजीत के साथ नैनीताल गया और वहां से रिवॉल्वर का इंतज़ाम किया. दीपक ने रिवॉल्वर के लिए 25 राउंड मुहैया कराए.

सचिन और मंगेश की बाइक पूरे गैंग के पास थी और एक क्वालिस गाड़ी का इंतज़ाम था जिसे सचिन चलाने वाला था. 10 जून तक कालिया ने अपने गैंग के साथ डे पर नज़र रखी और अगले दिन यानी 11 जून को कत्ल को अंजाम देने के लिए सभी तैयारियां पूरी कीं. 10 जून को तैयारियों और अपडेट्स को लेकर कालिया की तीन बार राजन से बातचीत हुई और तीसरे कॉल पर राजन ने फाइनल आॅर्डर दिया.

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अगले दिन दो बाइक और एक क्वालिस में सवार होकर कालिया और उसके गैंग ने डे का पीछा किया. 11 जून को जब डे पवई स्थित अपने घर की तरफ बाइक से जा रहे थे, तभी कालिया ने तड़ातड़ 5 गोलियां डे को मारीं और दिनदहाड़े कत्ल को अंजाम दिया. कत्ल के फौरन बाद राजन तक खबर पहुंचा दी गई – ‘आॅपरेशन डन.’

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छोटा राजन

इधर, कत्ल को अंजाम देने के तुरंत बाद सचिन की बाइक अरुण चला रहा था जिस पर पीछे बैठकर कालिया वहां से फरार हो गया. मंगेश अपनी बाइक पर अनिल को बिठाकर फरार हुआ और बाकी सब क्वालिस में बैठकर भाग गए. अनिल के साथ कालिया गुजरात, शिरडी, शोलापुर, बीजापुर और बाकी जगह पुलिस से बचने के लिए भागता रहा. बाकी सब अलग-अलग होकर अंडरग्राउंड हो गए. उधर, राजन ने विनोद असरानी के दोस्त मनोज से फोन पर शूटआउट के बारे में पूरी बात की और कहा – “डे अपनी हद पार कर चुका था इसलिए उसका मरना ज़रूरी था.”

जब छोटा राजन ने कहा – “ठीक है”

इस केस में प्रॉसिक्यूशन की इस कहानी को मनगढ़ंत करार देते हुए डिफेंस ने लगातार यही कहा कि यह झूठा केस है और उसके सभी मुवक्किल निर्दोष हैं लेकिन जांच रिपोर्टों और सबूतों व गवाहों के आधार पर प्रॉसिक्यूशन ने इस कहानी के कई बिंदुओं को साबित किया. इस पूरी जिरह के बाद पिछले ही महीने 2 मई 2018 को कोर्ट ने छोटा राजन और अन्य 9 आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई. सज़ा सुनने के बाद कोर्ट में छोटा राजन ने कहा – “ठीक है.”

जेडे केस की टाइमलाइन

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