हिंदी न्यूज़ – सीरिया पर अमेरिकी हमले को लेकर क्या कहती है वर्ल्ड मीडिया

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सीरिया पर अमेरिकी हमले को लेकर क्या कहती है वर्ल्ड मीडिया

प्रतीकात्मक फोटो

नदीम अहमद

नदीम अहमद

Updated: April 16, 2018, 7:50 PM IST

अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर शनिवार को सीरिया पर हवाई हमले किये. अमेरिका का दावा है कि उसने सीरिया में रासायनिक हथियारों को नष्ट कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सीरिया पर हमले जारी रहेंगे. आइए जानते हैं कि सीरिया पर अमेरिकी हमले को लेकर इंटरनेशनल मीडिया की क्या राय हैः

सऊदी अरब पर अमरीका की निंदा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कतर के अखबार अल जज़ीरा ने लिखा कि सऊदी अरब में आयोजित अरब लीग की बैठक में अमेरिकी हमले पर सभी ने ख़ामोशी बनाए रखी और अमेरिका के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि अरब लीग के नेताओं ने विवाद पर चर्चा तो की लेकिन उन्होंने सीरिया पर अमेरिकी हमले को लेकर कुछ नहीं कहा. बैठक के एजेंडे में सीरिया पर हुए हमले को शामिल नहीं करने को लेकर भी अखबार ने चिंता जाहिर की है.

डॉइचे विले ने ‘क्या सीरिया की समस्या एक आर्थिक युद्ध है?’ हेड लाइन के साथ लिखा है कि हर युद्ध के कुछ आर्थिक प्रभाव होते हैं. सीरिया का युद्ध एक प्रॉक्सी युद्ध है, जिससे समय के साथ कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियां जुड़ गयी हैं और इसका आर्थिक प्रभाव व्यापक होगा. डी डब्ल्यू डॉट कॉम ने लिखा है कि अमेरिका हर सूरत में सीरिया, हामी, रूस और ईरान को विश्व बाजार से अलग कर उन्हें कमजोर करना चाहता है.

इस बीच डॉन न्यूज ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस चेतावनी को काफी प्रमुखता से प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सीरिया पर हमलों से वैश्विक मामलों में तनाव और बढ़ेगा. डॉन ने यह भी लिखा है कि रूस और अमेरिका संबंधों में सालों से चल रही कड़वाहट को दूर करना चाहते हैं.दूसरी तरफ बीबीसी उर्दू ने ‘सीरिया पर हमला क्या है?’ शीर्षक से प्रकाशित एक विस्तृत लेख में कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने दावा किया है कि वे सुरक्षा परिषद की बजाय सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन कर रहे हैं. हालांकि, यह दावा प्रतिरोधी है. रूस ने पहले ही कहा है कि ये हमला अवैध है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी कहा है कि सुरक्षा परिषद का सम्मान होना चाहिए. लेख में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद का काम अपने हाथों ले कर दावा करना कि यह हमला सार्वजनिक हित में किया गया है, गलत है. इससे रूस और अमेरिका के बीच कोल्ड वॉर का अंदेशा होता है.

ख्याल रहे कि अरब देशों में विद्रोह से प्रेरित होकर सीरिया में लोगों ने मार्च 2011 में लोकतंत्र की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया. लोग राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ सड़कों पर आए और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए. उन्होंने असद से इस्तीफे की मांग की.

इन हमलों और विद्रोह का नतीजा यह हुआ कि सीरिया जो कभी एक सुंदर देश था, खंडहर में बदल गया. यहां जारी युद्ध में अब तक तीन लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

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