हिंदी न्यूज़ – संयुक्त विपक्ष में जगह न मिलने के बाद धरने की राजनीति से प्रासंगिक बने रहने की कोशिश में AAP-With No Place in Joint Opposition, AAP Goes Back to Dharna Politics to Stay Relevant

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OPINION: संयुक्त विपक्ष में जगह न मिलने से हताश AAP कर रही धरना पॉलिटिक्स

Delhi CM Arvind Kejriwal, Deputy CM Manish Sisodia and others during the protest. (Image via Twitter)

News18Hindi

Updated: June 14, 2018, 10:06 AM IST

सिद्धार्थ मिश्रा

साल 2013 में जब मुख्यमंत्री के तौर पर शीला दीक्षित के 15 साल का कार्यकाल खत्म होने के कगार पर था, तब उनके कुछ करीबी नौकरशाहों ने दूसरे शहर में ट्रांसफर ले लिया. उसी वक्त मनोहर पर्रिकर गोवा का मुख्यमंत्री बनने के बाद टीम बना रहे थे. क्योंकि अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, और केंद्रित शासित प्रदेशों में अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों एक कॉमन पूल है, इसलिए दिल्ली के कुछ अधिकारियों ने गोवा ट्रांसफर ले लिया.

उस वक्त एक अखबार ने अपनी हेडलाइन दी थी, ‘पर्रिकर की टीम में शीला के विश्वासपात्र.’ वैसे यह उतार-चढ़ाव देश में नौकरशाही के अराजनैतिक स्वभाव को भी प्रदर्शित करता है.

राजनीतिक नेतृत्व के पास नौकरशाहों से काम कराने के साधन होने चाहिए, जो कि पूरी तरह डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान के लिए उत्तरदायी हैं, संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद पालन के नियम तय होते हैं.नौकरशाही को लोक प्रशासन के शब्दावली में स्थायी कार्यकारी के रूप में परिभाषित किया गया है, जिससे उम्मीद की जाती है कि वे अपने काम और चुने हुए प्रतिनिधियों के काम के बीच संतुलन बनाकर रखेंगे.

इस व्यवस्था में घर्षण (टकराव) शामिल है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आईआईटी में पढ़ाई के दौरान घर्षण के बारे में जरूर पढ़ा होगा. घर्षण आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है. घर्षण की सबसे अच्छी बात यह है कि यह हर वक्त बिना गिरे चलने में मदद करता है.

अगर केजरीवाल और उनके मंत्रियों को लगता है कि दिल्ली की नौकरशाही उनके वैध आदेशों का पालन करने में नाकाम रही तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकते थे, बजाय इसके कि वे उप-राज्यपाल के ऑफिस में धरने पर बैठ जाते. यह कदम नौकरशाही को काम के प्रति उत्तरदायी बनाने के बजाय कुछ और उद्देश्य के लिए उठाया गया है. दरअसल यह गर्त में जाती आम आदमी पार्टी के पुनरुत्थान की कोशिश है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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