हिंदी न्यूज़ – भाई ने तेज़ाब से चेहरा जला दिया, उसके प्यार ने सारे ज़ख्म भर दिए /acid attack survivor finds love after a wrong number phone call

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मैंने गलती से उसका नंबर डायल किया. 15 दिनों बाद एक कॉल आया. ये वही Wrong number था. उसने गलती से फोन नहीं किया था. हमारी बात होने लगी. मैंने उसे एसिड अटैक के बारे में बताया. बताया कि मेरी 17 बार सर्जरी हो चुकी है और भी कई बाकी हैं. बताया कि चेहरा देखकर वो मुझसे प्यार नहीं कर सकेगा. उसने सारी दलीलें खारिज कर दीं. अब हम तमाम उम्र के लिए साथ हैं.

साल 2012 की बात है. तब मैं आजमगढ़ अपने एक कजिन की शादी में गई हुई थी.

शादियों का माहौल. दुपट्टा खोंसकर घर के काम निबटाती. बड़ी लड़की होने के नाते काफी सारी जिम्मेदारियां थीं. एक रोज ऐसे ही काम करते हुए मैंने देखा कि मेरा छोटा भाई और एक कजिन की बहस हो रही है. बहस हाथापाई में बदल गई. मैं काम में उलझी हुई थी लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि मुझे दखल देना पड़ा. मैंने दोनों को रोका. नहीं रुके तो एक-एक थप्पड़ जमा दिया. वो मेरे भाई थे. बड़ी बहन के नाते मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा. वो शादी तो हो गई लेकिन मेरी जिंदगी बदल गई. पांच महीने बाद मेरी शादी होनी थी लेकिन शादी के ठीक 15 दिनों पहले उसी कजिन ने मुझपर एसिड फेंक दिया. ये उस थप्पड़ का बदला था.

मेरा चेहरा पिघल रहा था. जलन के अलावा भीतर कोई अहसास बाकी नहीं था.मुझे अस्पताल ले जाया गया. महीनों अस्पताल में रही. कुछ वक्त पहले एक से दूसरी शादी के बीच मोहरे के फूल सी महमहाती. अब अस्पताल में मुझसे ऐसी गंध आती कि खुद भी बर्दाश्त नहीं कर पाती थी. छुट्टी मिला तो सबसे पहले अपना चेहरा देखा. वो चेहरा, जो बचपन से मेरी पहचान था, वो जा चुका था. हादसे के बाद मैं पहली बार फूट-फूटकर रोई. अब मैं कोई और ही ललिता हो चुकी थी.

गांव में इस पहचान के साथ जीना मुश्किल हो गया तो मुंबई आ गई. जान-पहचान वालों की मदद से गुजारे लायक काम मिला. काम तो मैं कर पाती थी लेकिन रोज आते-जाते लोगों की निगाहों का सामना करना सबसे मुश्किल था. हर कोई मुझे देखता और मैं सोचती कि मैं कहां गड़ जाऊं.

काम के सिलसिले में एक बार फोन कर रही थी कि एक रॉन्ग नंबर डायल हो गया.

हमारी बात मिनटभर भी नहीं हुई. बात आई-गई हो गई. थोड़े दिनों बाद रात में मेरे पास एक फोन आया. आवाज जानी-पहचानी लगी. ये वही रॉन्ग नंबर था. उसने अपना नाम रवि शंकर सिंह बताया. उसने गलती से फोन नहीं किया था. मुझे अजीब लगा. मैंने फोन रख दिया. वैसे भी अपनी ही जिंदगी में इतनी झंझटें थीं.

अगले दिन फिर उसका फोन आया. उसके अगले दिन फिर. वो रोज मुझसे बात करने की कोशिश करता. मैं भी बात करने लगी. वो इतना भला था कि मुझे अच्छा लगने लगा. इससे पहले कि वो भी मुझसे दिल जोड़ लेता, मैंने उसे अपनी हकीकत बता दी. मैंने बताया कि मेरा चेहरा बुरी तरह से जला हुआ है और ये कि मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगेगा अगर वो मुझसे बात करना बंद कर दे. उसने सारी बातें सुन लीं. फोन रखने के बाद मैं सिसक रही थी. मैं उसे पसंद करने लगी थी और मेरे चेहरे की वजह से वो अब मुझसे कभी बात नहीं करने वाला था.

अगली सुबह उसी वक्त उसका फोन आया. वो शांत था. मैं बदहवासी से भरी हुई.

कुछ दिनों बाद उसने मुझे प्रपोज कर दिया. मैंने समझाया कि बिना चेहरे की लड़की के साथ तो प्यार किया जा सकता है लेकिन जले हुए चेहरे की लड़की से नहीं. बदले में सुना कि वो मुझसे प्यार करता है, मेरे चेहरे से नहीं. ढेरों ऐसे रिश्ते होते हैं जो खूबसूरत चेहरों के कारण जुड़ते हैं और वक्त के साथ खत्म हो जाते हैं. उसे मेरी आवाज, मेरे दिल और मेरी जिंदादिली से प्यार था. मैंने हां कर दी.

अब हम शादीशुदा हैं. मेरे पिछले घर में कोई आईना नहीं था क्योंकि परिवार को लगता था कि मैं चेहरा देखकर तकलीफ में आ जाऊंगी. नए घर में हमने आदमकद आईने लगवाए हैं.

हम एकसाथ आईना देखते हैं. प्यार की खूबसूरती ने मेरे सारे जख्म भर दिए हैं.

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