हिंदी न्यूज़ – बहुत शातिर बिजनेसमैन हैं जकरबर्ग, इस मंत्र से बढ़े हैं आगे!, Mark Zuckerberg is ruthless businessman

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अमेरिकी कांग्रेस की कमेटी के सामने जब फेसबुक के फाउंडर और सीईओ मार्क जकरबर्ग पेश हुए तो उनसे एक सवाल पूछा गया. जिसका उनके पास कोई जवाब नहीं था. सवाल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की ओर से आया. उन्होंने पूछा, आपके वास्तविक चुनौतीकर्ता कौन हैं यानि वो कौन सी कंपनियां हैं, जो असल में फेसबुक के लिए चुनौती हैं.
जवाब में जकरबर्ग ने गूगल, एप्पल, माइक्रोसाफ्ट और एमेजन का नाम लिया. तब ग्राहम ने टोकते हुए कहा, मैं आपसे वास्तविक कंपटीटर की बात कर रहा हूं. इस पर जकरबर्ग ने चुप्पी साध ली. कुछ क्षणों बाद ग्राहम ने फिर कहा, क्या आपको लगता नहीं कि आपके अपने बिजनेस में आपकी मोनोपोली है यानि वर्चस्व है. नहीं, मुझे नहीं लगता, जकरबर्ग इतना ही कह सके.

जुकरबर्ग की मोनोपोली 
लेकिन असल में दुनिया के सोशल नेटवर्किंग मीडिया बिजनेस में जकरबर्ग की मोनोपोली ही है. इस मंत्र को वो बहुत पहले समझ चुके थे कि अगर आपको सोशल मीडिया के बिजनेस में छाना है तो अपने नेटवर्क को सबसे बड़ा करना होगा, फिर दौलत और ताकत खुद ब खुद आती चली जाएगी. ऐसा ही हुआ भी. वर्ष 2008 में फेसबुक अपनी पहचान बना चुका था लेकिन स्नैपचेट, इंस्टाग्राम, वाट्सएप और माइस्पेस उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थे.लोग ये भी मानते थे कि फेसबुक कभी माईस्पेस की जगह नहीं ले सकता. लेकिन आने वाले बरसों में फेसबुक सबको पीछे छोड़ता गया. आनलाइन एड बिजनेस के एक बड़े हिस्से पर कब्जा भी करता चला गया.

कभी एक कमरे से की थी शुरुआत
वर्ष 2004 में एक साधारण कमरे से शुरू हुई कंपनी अब दुनिया की सबसे ताकतवर कंपनी बन चुकी है, जिसकी आर्थिक मिल्कियत 540 बिलियन डॉलर की है. जकरबर्ग के साथ काम करने वाले सभी सहयोगियों ने बाद में उन पर चालाक होने के साथ विश्वासघात करने के आरोप लगाए. उन सभी का कहना था कि जुकरबर्ग ने उनका इस्तेमाल किया और फिर दूध में मक्खी की तरह उन्हें निकालकर बाहर फेंक दिया. इसीलिए फेसबुक के आगे बढ़ने के साथ उसके खिलाफ मुकदमे भी बढ़ते चले गए.

निष्ठुरता से बिजनेस 
लोगों की नजर में जकरबर्ग बहुत निष्ठुरता के साथ बिजनेस करते हैं. वह राह में आने वाली किसी भी चुनौती को नेस्तनाबून कर देते हैं. सोशल मीडिया नेटवर्क बिजनेस में उनकी मोनोपोली इस बात से भी समझी जा सकती है कि उन्होंने पिछले कुछ बरसों में उन सभी सोशल मीडिया प्लेट फार्म्स को मोटी कीमत देकर खरीद लिया, जो उनके लिए खतरा बन सकते थे या उनकी राह में रोड़े डाल सकते थे. इस लिहाज से उन्होंने वो रास्ता ही पूरा साफ कर डाला, जिस पर उनके फेसबुक का रथ आगे बढ़ रहा है.

facebook CEO mark zuckerberg wear grey t shirt

चुनौती देने वालों का टेकओवर 
उन्होंने पिछले कुछ सालों में वाट्सएप, इंस्टाग्राम, स्नैपचैप और स्काइप कंपनियों का टेकओवर कर लिया. इसने उन्हें इन सभी के नेटवर्क का अकेला मालिक बना दिया. स्नैपचेट के मालिक स्नीगेल अपनी कंपनी बेचने में ज्यादा इच्छुक नहीं थे, लेकिन जकरबर्ग ने जितनी कीमत की पेशकश की, उसके बाद वो भी डोल गए.
किसका मार्केट कितना बड़ा 
नवंबर 2017 के ड्रीमग्रो के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के यूजर्स इस तरह हैं
1. फेसबुक – 2.2 बिलियन से ऊपर
2. यूट्यूब – 1.6 बिलियन
3. इंस्टाग्राम – 800 मिलियन
4. ट्विटर – 300 मिलियन

..और नवंबर 2017 तक बड़े सोशल नेटवर्किंग एप्स की यूजर संख्या इस तरह है
1. मैसेंजर – 1.2 बिलियन
2. वाट्सएप – 1.2 बिलियन
3. वीचैट – 900 मिलियन
4. आरक्यू चैट – 800 मिलियन
5. इंस्टाग्राम – 800 मिलियन
(इसमें पहले पांच में आने वाले एप्स में चार जकरबर्ग की मिल्कयत बन चुके हैं)

इन आंकड़ों से जाहिर है कि किस तरह जकरबर्ग की सोशल नेटवर्किंग मीडिया में मोनोपोली बढ़ रही है. हालांकि गूगल उनका एक बड़ा कंपटीटर जरूर है लेकिन सोशल नेटवर्किंग में गूगल के तमाम प्लेटफार्म नाकाम हो चुके हैं. केवल यूट्यूब ही गूगल का सफल प्लेटफार्म है. फेसबुक वीडियो पर काम करके उसे भी चुनौती देने जा रहा है.

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