हिंदी न्यूज़ – क्रिमिनल स्केच आर्टिस्ट: एक दफा मेरे बनाए स्केच ने गवाह को मुजरिम बना दिया/ human story of an artist who sketches the criminals

0
1


मुझे याद नहीं, आखिरी बार कब मैं घूमने गया या फिर मोबाइल बंद करके पूरी रात की नींद ली.

रात-बेरात फोन घनघनाता है तो तपाक से उठाता हूं. अक्सर ये कॉल पुलिस महकमे से होता है. कहीं किसी मासूम के साथ वारदात होती है तो कहीं किसी ने अपराधी की झलक देखी होती है. कई बार लंबी ड्राइव करके वारदात वाले शहर पहुंचना होता है. अपराधियों का स्केच बनाता हूं. धमकियां मिलती हैं. लेकिन डरकर रुक जाना अपने ही हुनर का कत्ल होगा.

चौड़े माथे और मजबूत ठुड्डी वाले मनोज कुमार सिंह से बातचीत आपको पुलिसिया गलियारों की सैर कराते हुए सीधे अपराध की जगह ले जाती है. बिना मिले ही आप अपराधी के चेहरे की कल्पना करने लगते हैं. तभी तो जब मनोज कहते हैं, ‘ये काम मेरे लिए कला के जरिए न्याय पाने का जरिया है’ तो आप उनकी आवाज में इंसाफ की झलक देख पाते हैं.

अपराधी की उम्र क्या रही होगी? उसका कद? उसकी आंखें? उसकी नाक? क्या उसका माथा चौड़ा था? चेहरे पर कोई निशान? जब मैं ये सवाल पूछ रहा होता हूं तो साथ में चश्मदीद गवाह की आंखें भी पढ़ रहा होता हूं.अक्सर ये वही लोग होते हैं, जिनके साथ हादसा हुआ है. वे घबराए होते हैं. बात करने में ना-नुकुर करते हैं. गुनहगार की तस्वीर बनाने से भी ज्यादा मुश्किल होता है, गवाह को सहज करना. मनोज जैसे किसी किस्से को याद करते हुए बताते हैं.

कई बार गवाह रो-रो पड़ते हैं. अपराधी का चेहरा याद करना भी अपराध होते देखने जैसा ही है.

कई बार छोटे बच्चे चश्मदीद गवाह होते हैं. आप कैसे उनसे सीधे पूछेंगे कि बताओ मुजरिम की नाक पर तिल था या नहीं! बहुत संभलकर सवाल करना होता है. मज़लूम को यकीन दिलाना होता है कि तस्वीर बनवाने पर वो किसी मुसीबत में नहीं पड़ेंगे.

आगरा की राजामंडी के मनोज लगभग 15 सालों से क्रिमिनल स्केच आर्टिस्ट का काम कर रहे हैं. काम की शुरुआत शौकिया हुई. मनोज याद करते हैं, छुटपन से ही मुझे पोट्रेट बनाने का शौक रहा. फिर इसी में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली. तब आगरा के फाइन आर्ट्स कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर चुका था.

एक रोज पुलिस महकमे के एक साथी का फोन आया. वो किसी वारदात के सबूत तलाश रहे थे. मैंने मदद के लिए हां कह दी. ये शुरुआत थी. तब से लगातार अपराधियों के स्केच बना रहा हूं.

30 से ज्यादा ऐसे केस हैं, जिनमें मेरे बनाए स्केच के आधार पर अपराधी पकड़े गए.

मनोज ये बात यूं ही नहीं कहते. हर केस की एक कहानी जैसे उनकी जिंदगी से घुली-मिली है. पिछले साल एक बच्ची के बलात्कार के बाद अपराधी ने उसे बेरहमी से मार दिया. मौत इतनी खौफनाक थी कि वाकये की जगह पर खड़ा हुआ मैं देर तक चुप रहा. फिर मुझे सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई. एक कमउम्र लड़के का धुंधला-सा अक्स नजर आ रहा था, वो भी साइड से. उसे देखकर ही मैंने पूरा चेहरा बनाने की कोशिश की. लड़के को पकड़ लिया गया. बाद में पता चला कि वो लड़का चश्मदीद गवाह है. फिर उसकी मदद से मैंने असल अपराधी को उकेरा. ऐसे ढेरों वाकये हैं.

क्रिमिनल स्केच आर्टिस्ट का सबसे बड़ा डर क्या होता है? मनोज कहते हैं- वही, जो गवाह का होता है. कहीं ऐसा न हो कि गलत चेहरा बन जाए और कोई बेकसूर फंस जाए.

अपराध के गवाह भी सबसे ज्यादा इसी बात से घबराए होते हैं. कुछ ही मिनटों में अंजाम दी गई वारदात के वक्त अपराधी का चेहरा इतनी पक्की तरह से कैसे याद रहे! लोग बताने में टालमटोल करते हैं. मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि स्केच असल साक्ष्य नहीं बनेगा, ये सिर्फ मुजरिम तक पहुंचने में मदद करेगा. अक्सर वारदात की जगह जाकर ही तस्वीर बनानी होती है. पुलिस भी साथ होती है लेकिन मैं कोशिश करता हूं कि स्केचिंग के दौरान पुलिस सामने न रहे.

थोड़ा-थोड़ा बनाने के बाद चश्मदीद को स्केच दिखाता हूं. वे जो घट-बढ़ कहते हैं, मैं जोड़ता हूं.

अक्सर स्केच पूरा होने के बाद गवाह डर जाते हैं कि तस्वीर असल अपराधी से कितनी मिलती है. ये डर मेरा मेहनताना है. वैसे एक केस के लगभग 5 हजार दिए जाते हैं.

क्रिमिनल स्केच बनाने के लिए एक खास तरह की पेंसिल का इस्तेमाल होता है. ये आधा इंच से भी मोटी होती है. कागज भी साथ ही कैरी करता हूं. पेंसिल और कागज पर तस्वीर उकेरने के बाद उसे डिजिटली भी एडिट किया जाता है. कई बार अपराधी नकली बाल, मूंछें लगाकर, टोपी पहनकर वारदात को अंजाम देते हैं. डिजिटल एडिटिंग में सारी चीजें हटाकर या जोड़कर देखी जाती हैं.

कई बार ये काम बहुत बोझिल होता है. तस्वीर बनाना भी किसी गुनाह का गवाह बनने की ही तरह होता है. वो हादसा फिर-फिर दोहराया जाता है. अपराधी की आंखें बनाते हुए मजलूम की आंखों का दर्द झिलमिला उठता है.

कभी डर लगता है कि एक गलती किसी बेकसूर को गिरफ्त में न ला दे. कभी धमकियां मिलती हैं कि जान से जाओगे. इन सबसे बावजूद जब मेरी तस्वीर इंसाफ पाने की कोशिश का हिस्सा बनती है तो सुकून मिलता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here