हिंदी न्यूज़ – एक लड़की लाने के बदले मिलते थे 20 से 50 हज़ार रुपये

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बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले का रहने वाला फराख अपनी बहन से जलता था. उसकी बहन फरहत दिल्ली में रहती थी. फरहत का महंगा फ्लैट, फैशनेबल कपड़े और हमेशा हज़ारों लाखों रुपयों के बंडल देखकर फराख हमेशा चाहता था कि उसकी लाइफस्टाइल भी इतनी रंगीन हो. यही जलन और चाहत फराख को जुर्म की उस दुनिया में घसीटती ले गई जिसे लोग घिनौना तक कहते हैं.

अपनी बहन और उसके पति के लाइफस्टाइल को देखकर उनकी तरह अमीर बनने का ख्वाब देखने वाला फराख अक्सर अपने दोस्तों को फरहत के घर के किस्से सुनाता और कहता कि ऐसा कुछ करना है कि इतनी दौलत हो. एक रोज़ फराख ने अपने दिल की बात फरहत के सामने रख ही दी. फरहत ने कहा कि वह उससे जल्द ही अपने पति के साथ मिलकर बात करेगी.

फरहत ने फराख के सामने एक स्कीम रखी और कहा कि अगर उसने ऐसा किया तो क्वालिटि के हिसाब से हर लड़की के लिए उसे 20 से 50 हज़ार रुपये मिल सकते हैं. एक पल को फराख को यकीन नहीं हुआ कि उसकी बहन इस गुनाह में है. फिर उसने सोचा कि यह जल्द ज़्यादा पैसे कमाने का यह आसान रास्ता है और बरसों से फरहत और उसका पति इस काम में हैं लेकिन उनकी ज़िंदगी तो ठीक चल रही है. वह राज़ी हो गया. फरहत ने इस काम को अंजाम देने रास्ता भी बता दिया था.

24 परगना भारत के सबसे पिछड़े ज़िलों में शुमार है. यहां गरीबी, बेरोज़गारी जैसी तमाम मुश्किलों का जीवन है. ज़िले के और आसपास के गांवों में और भी खराब हालात हैं. फराख ने पूरा इंतज़ाम किया. एक अच्छी बाइक, एक बहुत महंगा मोबाइल फोन, बढ़िया घड़ी और गॉगल वगैरह. इसी के साथ उसने अपने नेटवर्क के ज़रिये अपने काम की खबरें निकालना भी शुरू कीं.

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ग्राफिक : नेटवर्क 18 क्रिएटिव

कुछ ही दिनों में वह सज—धजकर अपनी बाइक से गांवों में जाता और राउंड लगाकर अपने नेटवर्क के लोगों से बातचीत करता. एक गांव में एक दिन मोबाइल फोन रिचार्ज की छोटी सी दुकान पर फराख की नज़र एक जाती हुई लड़की पर पड़ी. फराख ने उस दुकानदार से उस लड़की का नंबर लिया और बदले में सौ रुपये उसे दिए. यह भी कहा कि वह आगे भी कुछ नंबर लेता रहेगा और हर नंबर के लिए सौ रुपये देगा.

फराख ने जिस लड़की का नंबर लिया था वह 16 साल की विनीता थी. गांव के ही एक गरीब परिवार की विनीता से फराख ने बातचीत की. पहले उसे अपनी बातों से प्रभावित किया. फिर वह लगातार उससे बातें करता रहा और अपनी पहुंच और पहचान बताकर उसने एक दिन विनीता से कहा कि वह शहर जाकर अच्छी नौकरी कर सकती है और फराख इस काम में उसकी पूरी मदद कर सकता है.

तकरीबन 15 बार फराख और विनीता की बातचीत हो चुकी थी और उस दिन विनीता मथुरापुर रेलवे स्टेशन पर थी. यहां फराख उससे मिला और उसे दिल्ली ले गया. विनीता को कोई अंदाज़ा नहीं था कि फराख का मकसद क्या है या उसके साथ क्या होने वाला है. रास्ते में फराख ने उसे कुछ खिलाया पिलाया भी जिसके कारण दिल्ली पहुंचते विनीता कुछ बेसुध सी हो गई. विनीता को फराख दिल्ली में फरहत के घर ले गया और विनीता को इंट्रोड्यूस करवाकर उसे आराम करने को कहा.

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एक—दो दिन में विनीता से कहा गया कि आगरा में उसकी नौकरी लग गई है. विनीता को आगरा ले जाया गया. यह जगह विनीता को समझ नहीं आई क्योंकि यहां कई लड़कियां थीं जिनके चेहरे और नज़रें विनीता को देखकर रहस्यमयी हो गए थे. विनीता को एक कमरे में रहने को कहा गया. इस कमरे में जाते ही इसे बंद कर दिया गया. विनीता को अब समझ आ चुका था कि वह कहां आ गई है.

अगले एक—दो दिन में ही विनीता को खाने को बहुत कम कुछ दिया गया था जिससे उसकी हालत बिगड़ चुकी थी. फिर एक आदमी उसके कमरे में आया और विनीता को जिसका डर था, उसने वही किया. अब यह सिलसिला शुरू हो गया. इस दौरान विनीता को दवा के नाम पर कुछ इंजेक्शन दिए जाते थे. कभी—कभी एक दिन में 15 से 20 कस्टमर तक उसके पास आते थे. इसी बीच विनीता ने महसूस किया कि कुछ ही दिनों में उसका वज़न काफी बढ़ गया है और चेहरा भी भर गया है.

एक दिन विनीता को मौका मिला और उसने एक कस्टमर के मोबाइल फोन से अपने घर में फोन करके अपना पता ठिकाना और दुख दर्द बता दिया. अब विनीता को इंतज़ार था कि जल्द ही कोई आएगा और उसे यहां से छुड़ाएगा. उसका इंतज़ार रंग लाया और एक एनजीओ शक्ति वाहिनी की टीम किसी तरह वहां पहुंच गई. विनीता का जो फोटो परिवार से मिला था, कुछ ही महीनों में उससे बहुत अलग दिख रही थी विनीता. विनीता के साथ ही 6 और लड़कियों को पिछले साल जुलाई में आज़ाद करा लिया गया.

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लड़कियों को गुलाम बनाकर उनका शोषण किए जाने की खबरें थमी नहीं हैं. एक ताज़ा खबर बिहार के मुज़फ्फरपुर से आई है जिसके मुताबिक बंगाल की एक नाबालिग लड़की को घरेलू गुलाम बनाकर उसका इस्तेमाल किया गया. 14 साल की इस लड़की के साथ मारपीट और दुष्कर्म किया जाता था. इस लड़की पर तेज़ाब भी फेंका गया.

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इस एक्शन के बाद फराख की गिरफ्तारी भी हुई जिसने लड़कियों के अपहरण और मानव तस्करी के रैकेट में उन्हें बेचने का जुर्म कबूल भी कर लिया. इस एनजीओ ने बताया था कि बंगाल की कई लड़कियां ऐसी मानव तस्करी की शिकार होती हैं. यहां तक कि ऐसे हालात से छुड़ाई जाने वाली करीब 60 फीसदी लड़कियां बंगाल के पिछड़े इलाकों के गरीब परिवारों की पाई गई हैं.

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