हिंदी न्यूज़ – आग के ढेर पर दिल्‍ली, जिम्‍मेदारी किसकी है पता नहीं!Delhi: Fire can break out anytime in Delhi, only 30 thousand NOC given by Fire department since 1983

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मुंबई के वर्ली में 33 मंजिला इमारत में लगी आग के बाद अब राजधानी दिल्‍ली को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. दिल्‍ली-एनसीआर में भी हाईराइज बिल्डिंग हैं. कब किस जगह आग लग जाए पता नहीं. राजधानी में न कोई सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही सरकार और जिम्‍मेदार विभाग इस ओर ध्‍यान दे रहे हैं. यही वजह है कि दिल्‍ली में आए दिन आग लगने की घटनाएं हो रही हैं और लोगों को जान गंवानी पड़ रही है.

हाल ही में बवाना स्थित एक पटाखा फैक्‍ट्री में आग लगी और 17 लोगों की मौत हो गई थी. जांच में सामने आया कि इस फैक्‍ट्री के पास आग से बचने के कोई इंतजाम नहीं थे. साथ ही इसने फायर डिपार्टमेंट से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) भी नहीं ली थी. इसी तरह का मामला पश्चिमी बवाना में भी हुआ जब बिना एनअोसी के चल रहे प्‍लास्टिक गोदाम में आग लग गई. हाल ही में मालवीय नगर में रबड़ गोदाम में आग लग गई, जिसके पास एनओसी नहीं थी. यहां आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्‍टर की मदद ली गई.

फायर डिपार्टमेंट दिल्‍ली के डायरेक्‍टर जीसी मिश्रा बेहद चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं. मिश्रा के मुताबिक दिल्‍ली में अनुमानित 65 लाख बिल्डिंग, यूनिट या स्‍ट्रक्‍चर हैं. लेकिन 1983 से लेकर अभी तक करीब 30 हजार बिल्डिंग या स्‍ट्रक्‍चर को ही फायर की एनओसी दी गई है.

fire, file photo

हालांकि वे कहते हैं कि सभी 65 लाख बिल्डिंग या स्‍ट्रक्‍चर को फायर डिपार्टमेंट से एनओसी लेने की जरूरत नहीं है. इनमें वे छोटी यूनिट और घर भी आते हैं जो दिल्‍ली फायर सर्विस एक्‍ट 2007 के तहत एनओसी लेने वालों के दायरे में ही नहीं आते हैं.

आंकड़े बताते हैं कि 35 सालों में दिल्‍ली में करीब 30 हजार बिल्डिंगों को एनओसी दी गई है. इससे भी ज्‍यादा दिलचस्‍प बात है कि दिल्‍ली की कितनी इमारतें एनओसी लेने वाली बिल्डिंग या स्‍ट्रक्‍चर के दायरे में आती हैं. उन्‍हें एनओसी लेनी चाहिए. इसका आंकड़ा फायर डिपार्टमेंट के पास उपलब्‍ध नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक अभी तक कितनी हाईराइज बिल्डिंग या फैक्ट्रियां दिल्‍ली में हैं और कितनों को फायर डिपार्टमेंट ने अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया है इसका डाटा उपलब्‍ध नहीं है.

file photo

फायर डिपार्टमेंट की अोर से बताया गया कि विभाग सिर्फ उन्‍हीं बिल्डिंगों को एनओसी जारी करता है, जो बिल्डिंग सेंक्‍शनिंग अथॉरिटी या दिल्‍ली नगर निगम (तीनों) की ओर से उनके पास एनओसी के लिए भेजी जाती हैं. ऐसे में अगर कोई फैक्‍ट्री या बिल्डिंग बिना एनओसी के चल रही है तो यह लोकल अथॉरिटी की जिम्‍मेदारी है.

एनओसी के मुद्दे पर उत्‍तरी दिल्‍ली नगर निगम के पीआरओ योगेंद्र मान ने कहा कि जब निगम के पास नक्‍शा पास होने के लिए अाता है और वे फायर डिपार्टमेंट के पास एनओसी के लिए भेज देते हैं. अनधिकृत इलाके में चल रही फैक्‍ट्री और बिल्डिंग अवैध निर्माण होते हैं और इनमें फायर सेफ्टी भी नहीं होती, लेकिन इसकी जिम्‍मेदारी निगम की नहीं है.

file photo

वहीं दिल्‍ली सरकार से जब एनओसी को लेकर बात की गई तो दिल्‍ली सरकार के पीआरओ अरुणोदय की ओर से कहा गया कि फायर सेफ्टी और एनओसी को लेकर पहले दिल्‍ली सरकार कुछ काम करती थी लेकिन अब विभागों के सभी अधिकारी एलजी को रिपोर्ट कर रहे हैं, ऐसे में इस मुद्दे पर एलजी ही जानकारी दे सकते हैं. उन्‍होंने एनओसी प्राप्‍त बिल्डिंगों या एनओसी के दायरे में आने वाली इमारतों के संबंध में कोई आंकड़ा नहीं दिया.

ऐसे में तय है कि दिल्‍ली नगर निगम (तीनों), फायर डिपार्टमेंट और दिल्‍ली सरकार की लापरवाही के चलते राजधानी में बिना एनओसी वाली इमारतों की पहचान नहीं हो पा रही है. न ही इन फैक्‍ट्री या इमारतों पर कोई कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में आए दिन आग की घटनाएं घट रही हैं.

(DEMO PIC)

क्‍यों जरूरी है एनओसी 

किसी भी इमारत या बिल्डिंग के लिए फायर डिपार्टमेंट से एनओसी लेना बेहद जरूरी है. एनओसी का तात्‍पर्य है कि इस बिल्डिंग में आग लगने की स्थिति में सुरक्षा के पर्याप्‍त इंतजाम मौजूद हैं. एनओसी उन्‍हीं बिल्डिंग, फैक्‍ट्री, मर्केंडाइल बिल्डिंग, रेस्‍टोरेंट, गैस्‍ट हाउस, स्‍कूल और अस्‍पतालों को लेनी होती है जो दिल्‍ली फायर सर्विस एक्‍ट 2007 के तहत आग से सुरक्षा के इंतजाम करने और विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के दायरे में आते हैं.

ये इमारतें आती हैं दायरे में

प्रतीकात्मक चित्र

दिल्‍ली फायर सर्विस एक्‍ट 2007 के नियम 27 के तहत एनओसी लेने वालों में ये इमारतें शामिल हैं.

. 9 मीटर से ऊपर सभी स्‍कूल और मर्केंडाइल बिल्डिंग

. 15 मीटर से ऊंची सभी रेजिडेंशियल इमारतें और ऑफिस

. 250 स्‍कवायर मीटर से ज्‍यादा में फैले उद्योग या फैक्‍ट्री

. 12 मीटर से ऊपर गैस्‍ट हाउस और असेंबली बिल्डिंग

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