हिंदी न्यूज़ – अपने पहले विदेश दौरे के लिए नेपाल के PM ने भारत को क्यों चुना?-Traditions Set Aside as India and Nepal Try to Turn Back the Clock

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महा सिद्दीकी

नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली पदभार संभालने के बाद अपने पहले विदेश दौरे के भारत को चुना है. ओली शनिवार को अपनी पत्नी राधिका शाक्य के साथ तीन दिनों के लिए भारत की यात्रा पर आए हैं. ओली की यह यात्रा किसी नेपाली प्रधानमंत्री के पद संभाल के बाद विदेश दौरों की शुरुआत भारत से करने की परंपरा को आगे बढ़ाने के तहत है.

के.पी. शर्मा ओली 8 अप्रैल तक भारत में रहेंगे. इस दौरान नेपाल के मंत्रियों, सांसदों, सचिवों और सीनियर अफसरों का एक डेलीगेशन भी रहेगा. उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को आगे बढ़ाना है.

शनिवार को नेपाल के पीएम ने अपनी पत्नी के साथ राजघाट में बापू की समाधि पर श्रद्धांजलि दी. फिर हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विस्तृत साझेदारी पर चर्चा हुई. इसके पहले नेपाल के पीएम ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित सरकारी आवास पर उनसे मुलाकात की थी. प्रोटोकॉल के मुताबिक, ऐसी मुलाकात हैदराबाद हाउस में रखी जाती है. लेकिन, नेपाली पीएम के मामले में ऐसा नहीं किया गया.

सूत्रों के मुताबिक, डेलीगेशन स्तर की बातचीत से पहले दोनों नेता अकेले में बात करना चाहते थे. इसलिए ऐसा किया गया. दोनों नेताओं ने करीब एक घंटे तक विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की.

मोदी से पहले राहुल गांधी ने मिलने गए ओली
यहां गौर करने वाली बात है कि नेपाल के पीएम प्रधानमंत्री मोदी से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. आमतौर पर भारत की यात्रा पर आए कोई विदेशी पीएम सबसे पहले प्रधानमंत्री या उनके किसी कैबिनेट मंत्री से मुलाकात करता है. विपक्ष के नेता से मुलाकात का कार्यक्रम इसके बाद ही तय किया जाता है. लेकिन, ओली के मामले में ऐसा नहीं हुआ. इसके पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2014 में भारत यात्रा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की इच्छा जाहिर की थी. तब रूस के दूतावास ने इसका इंतजाम किया था.

पिछले कार्यकाल में भारत पर निर्भरता घटाई
के.पी. ओली जब अक्टूबर 2015 में नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने भारतीय ईंधन, दवाइयों और अन्य सामानों पर निर्भरता की स्थिति से निपटने के लिए चीन के साथ एक समझौता किया था. इसके बाद एक्सपर्ट्स ने भी माना कि के.पी. ओली अब चीन की तरफ झुक रहे हैं.

नेपाल में बढ़ेगा चीन का प्रभाव?
नेपाल को हमेशा से ही भारत का दोस्त रहा है और यह चीन को नागवार गुजरता है. कई बार यह भी आरोप लगे हैं कि भारत नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है. लेकिन लेफ्ट गठबंधन की सरकार से नेपाल में चीन का प्रभाव बढ़ सकता है. दरसअल, ऐसा माना जाता है कि पूर्व माओवादी विद्रोहियों और मुख्य कम्युनिस्ट पार्टी को एक साथ लाने के पीछे चीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ताकि यह गठबंधन जीते और उसको फायदा पहुंचे.

नेपाल में उज्जवला योजना शुरू करने में भारत करेगा मदद
हालांकि, इस चिंता के बीच नेपाल के पीएम ने भारत का दौरा कर सद्भावना और सहयोग का संदेश दिया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री संयुक्त रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कुछ योजनाओं की शुरुआत भी कर सकते हैं. इसमें 69 किलोमीटर लंबी मोतीहारी-अम्लेखगंज पाइपलाइन प्रोजेक्ट भी शामिल है. इसके पूरा होने पर नेपाल को भारत की ओर से लगातार पेट्रोलियम की सप्लाई होती रहेगी. इसके साथ ही भारत ‘प्रधानमंत्री उज्जवला योजना’ को नेपाल में शुरू करने में मदद करेगा.

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