अजब-गज़ब: यह मंदिर किसी अजूबे से कम नहीं

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मध्य प्रदेश में ऐसे-ऐसे अजब-गज़ब किस्सों और मान्यताओं की भरमार है, जिसे सुनने और क़रीब से जानने के बाद भी लोगों को यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है कि क्या वाक़ई ऐसा भी होता है. लेकिन यही सच है. ऐसा ही एक अजब-गज़ब क़िस्सा छुपा है, छतरपुर ज़िले के घुवारा इलाक़े में.

यहां है अबार माता का मंदिर. यह मंदिर किसी अजूबे से कम नहीं है. यहां तक़रीबन सत्तर फीट ऊंची एक चट्टान है, जिसके बारे में कहा जाता है कि कुछ समय पहले तक ये केवल कुछ फीट का था. लेकिन धीरे-धीरे इसका आकार बढ़ते-बढ़ते क़रीब सत्तर फ़ीट तक पहुंच चुका है. इस ऊंचे चट्टान के बारे में अनोखी मान्यता है कि इसके स्पर्श मात्र से निःसंतान को संतान की प्राप्ति हो जाती है.

मान्यताओं के संसार में सांस लेने वाले लोगों का हना है कि माता अबेर के मंदिर के इस ऊंचे चट्टान का क़िस्सा सीधे भगवान भोलेनाथ से जुड़ता है. माना जाता है कि ये चट्टान हर साल शिवरात्रि में तिल भर बढ़ रहा है. यानि इसके आकार को लेकर यहां आने वाले लोगों की आस्था गज़ब की है. इस कहानी का इतिहास सदियों पुराना बताया जाता है. माना जाता है कि बुंदेलखंड के मशहूर ऐतिहासिक योद्धा आल्हा ने इस मंदिर को बनवाया था.

चट्टान के ऊपर बनाये गए मंदिर में कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं कराई गई. आस्था है कि चट्टान के ऊपर बने मंदिर से निःसंतान महिलायें मां बनने का माता से आशीर्वाद मांगती हैं, जिन्हें माता अबार के आशीर्वाद से मां बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है. चट्टान के बाद हम मंदिर के रहस्य और मान्यताओं को समझने की कोशिश कर रहे थे.

इस मंदिर को लेकर कई रहस्य और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. मान्यता है कि सदियों पहले बुंदेलखंड के महान योद्धा आल्हा और उदल यहां से निकले और उन्हें शाम देर यानि देसी भाषा में अबेर हो गई. जिसके चलते उन्होंने यहीं पर अपना डेरा डाल दिया और अपनी आराध्य देवी का आह्वान किया. मां ने अपने भक्त को दर्शन दिए और उसके बाद से इन्हें अबेर माता कहा जाने लगा. बाद में अबेर माता को अबार माता कहा जाने लगा.

मंदिर को लेकर ये भी मान्यता है कि किसी भी शुभ काम को लेकर कोई भी मन्नत मांगने के लिए इस मंदिर की चट्टान पर हाथ रखने का अपना ही एक सलीका और तरीक़ा है. पहले हाथ को उल्टा रखकर मान्यता मांगो और मान्यता पूरी हो जाने पर हाथ के निशान सीधे करके मां को धन्यवाद दो.

इस मंदिर के पुजारी बताते है कि मां को लेकर जो मान्यता है, उसे उन्होंने हर बार साकार होते हुए देखा है. जिसका सिलसिला लगातार जारी है. छतरपुर के इस ऊंचे बढ़ते चट्टान और माता अबार से जुड़े अजब-गज़ब तथ्यों को जानने के बाद सभी आश्चर्य व्यक्त करते हैं.

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